किसान चिंतित है

13 जून 2016   |  सुशील कुमार शर्मा   (182 बार पढ़ा जा चुका है)

किसान चिंतित है
सुशील शर्मा

किसान चिंतित है फसल की प्यास से ।
किसान चिंतित है टूटते दरकते विश्वास से।
किसान चिंतित है पसीने से तर बतर शरीरों से।
किसान चिंतित है जहर बुझी तकरीरों से।
किसान चिंतित है खाट पर कराहती माँ की खांसी से ।
किसान चिंतित है पेड़ पर लटकती अपनी फांसी से।
किसान चिंतित है मंडी में लूटते लुटेरों से।
किसान चिंतित है बेटी के दहेज़ भरे फेरों से ।
किसान चिंतित है पटवारियों की जरीबों से।
किसान चिंतित है भूख से मरते गरीबों से।
किसान चिंतित है कर्ज के बोझ से दबे कांधों से।
किसान चिंतित है अपनी जमीन को डुबोते हुए बांधों से।
किसान चिंतित है भूंखे अधनंगे पैबंदों से।
किसानचिंतित है फसल को लूटते दरिंदोंसे ।
किसान चिंतित है खेत की सूखी पड़ी दरारों से ।
किसान चिंतित है रिश्तों को चीरते संस्कारों से।
किसान चिंतित है जंगलों को नौचती हुई आरियों से।
किसान चिंतित है बोझिल मुरझाई हुई क्यारियों से।
किसान चिंतित है साहूकारों के बढ़े हुए ब्याजों से।
किसान चिंतित है देश के अंदर के दगाबाजोंसे ।
किसान चिंतित है एक बैल के साथ खुद खींचते हुए हल से।
किसान चिंतित है डूबते वर्तमान और स्याह आने वाले कल से।

अगला लेख: क्या मैं लिख सकूँगा ?



रेणु
07 मार्च 2017

किसान की चिंताएं मुखर करती आपकी रचना काबिलेतारीफ है सुशिल जी -- सचमुच धरती - पुत्र का दुर्भाग्य है की उसकी चिंता करने वाला कोई नही | आज के युग की विराट साधना और संघर्ष है -किसान जीवन | किसान के प्रति इस हृदयस्पर्शी रचना के लिए आपको बहुत बधाई

किसान चिंतित है सच्ची रचना लेखक की लेखनी को साधुवाद

किसान के नाम 5% सेस लगा कर किसान को शेष भरत का प्रतिद्वंदी बना दीया गया इससे किसान को दूसरों नज़रों में गिरने का कड़ी किया जा रह्हा है किसान को इससे कोइ लाभ नही होने वाला .

किसान के नाम 5% सेस लगा कर किसान को शेष भरत का प्रतिद्वंदी बना दीया गया इससे किसान को दूसरों नज़रों में गिरने का कड़ी किया जा रह्हा है किसान को इससे कोइ लाभ नही होने वाला .

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