किसान चिंतित है

13 जून 2016   |  सुशील कुमार शर्मा   (197 बार पढ़ा जा चुका है)

किसान चिंतित है
सुशील शर्मा

किसान चिंतित है फसल की प्यास से ।
किसान चिंतित है टूटते दरकते विश्वास से।
किसान चिंतित है पसीने से तर बतर शरीरों से।
किसान चिंतित है जहर बुझी तकरीरों से।
किसान चिंतित है खाट पर कराहती माँ की खांसी से ।
किसान चिंतित है पेड़ पर लटकती अपनी फांसी से।
किसान चिंतित है मंडी में लूटते लुटेरों से।
किसान चिंतित है बेटी के दहेज़ भरे फेरों से ।
किसान चिंतित है पटवारियों की जरीबों से।
किसान चिंतित है भूख से मरते गरीबों से।
किसान चिंतित है कर्ज के बोझ से दबे कांधों से।
किसान चिंतित है अपनी जमीन को डुबोते हुए बांधों से।
किसान चिंतित है भूंखे अधनंगे पैबंदों से।
किसानचिंतित है फसल को लूटते दरिंदोंसे ।
किसान चिंतित है खेत की सूखी पड़ी दरारों से ।
किसान चिंतित है रिश्तों को चीरते संस्कारों से।
किसान चिंतित है जंगलों को नौचती हुई आरियों से।
किसान चिंतित है बोझिल मुरझाई हुई क्यारियों से।
किसान चिंतित है साहूकारों के बढ़े हुए ब्याजों से।
किसान चिंतित है देश के अंदर के दगाबाजोंसे ।
किसान चिंतित है एक बैल के साथ खुद खींचते हुए हल से।
किसान चिंतित है डूबते वर्तमान और स्याह आने वाले कल से।

अगला लेख: क्या मैं लिख सकूँगा ?



रेणु
07 मार्च 2017

किसान की चिंताएं मुखर करती आपकी रचना काबिलेतारीफ है सुशिल जी -- सचमुच धरती - पुत्र का दुर्भाग्य है की उसकी चिंता करने वाला कोई नही | आज के युग की विराट साधना और संघर्ष है -किसान जीवन | किसान के प्रति इस हृदयस्पर्शी रचना के लिए आपको बहुत बधाई

किसान चिंतित है सच्ची रचना लेखक की लेखनी को साधुवाद

किसान के नाम 5% सेस लगा कर किसान को शेष भरत का प्रतिद्वंदी बना दीया गया इससे किसान को दूसरों नज़रों में गिरने का कड़ी किया जा रह्हा है किसान को इससे कोइ लाभ नही होने वाला .

किसान के नाम 5% सेस लगा कर किसान को शेष भरत का प्रतिद्वंदी बना दीया गया इससे किसान को दूसरों नज़रों में गिरने का कड़ी किया जा रह्हा है किसान को इससे कोइ लाभ नही होने वाला .

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
09 जून 2016
. दहकता बुंदेलखंड जीवन की बूंदों को तरसा भारत का एक खण्ड। सूरज जैसा दहक रहा हैं हमारा बुंदेलखंड। गाँव गली सुनसान है पनघट भी वीरान। टूटी पड़ी है नाव भी कुदरत खुद हैरान। वृक्ष नहीं हैं दूर तक सूखे पड़े हैं खेत। कुआँ सूख गढ्ढा बने पम्प उगलते रेत। कभी लहलहाते खेत थे आज लगे श्मशान। बिन पानी सूखे पड़े नदी नह
09 जून 2016
15 जून 2016
खे
खेती में कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से कहीं, 07 वर्ष की लड़कियों में माहवारी शुरू हो रही है, तो कहीं मनुष्यों के सेक्स में ही परिवर्तन हुआ जा रहा है। विश्व बैंक के अनुसार दुनिया में 25 लाख लोग प्रतिवर्ष कीटनाशकों के दुष्प्रभावों के शिकार होते हैं, जिसमें से 05 लाख लोग काल के गाल में समा जाते हैं। फ
15 जून 2016
11 जून 2016
1
12वीं के  बाद का भविष्य -कैसे करें केरियर का चुनाव सुशील कुमार शर्मा 12 वीं के बाद अजीत को समझ में नहीं आ रहा है कि वह किस विषय का चुनाव करे जो भविष्य में उसके लिए सफलता के दरवाजे खोले। परिवार के आधे लोग चाहते हैं की वह इंजीनियर बने आधे चाहते हैं की वह सिविल सर्विसेज में जाए दोस्त उसे बिजिनेस कोर्स
11 जून 2016
02 जून 2016
बघुवार-स्वराज मुमकिन है। सुशील कुमार शर्मा archanasharma891@gmail .com मायाजी की इस पुस्तक का विमोचन ग्राम बघुवार में हो रहा था। ABP न्यूज़ के मध्यप्रदेश हेड श्री ब्रजेश राजपूत जो कि मुझे भ्रातवत अपनत्व प्रदान करते हैं के  सन्दर्भ से मायाजी की ओर से विमोचन का निमंत्रण आया लेकिन शासकीय व्यस्तताओं के
02 जून 2016
10 जून 2016
हे
हे परीक्षा परिणाम ,मत डराओ बच्चों को सुशील शर्मा हे परीक्षा परिणाम मत सताओ बच्चों को, प्यारे बच्चों के मासूम दिलों से खेलना बंद करो। न जाने कितने मासूम दिलों से तुम खेलते हो ,न जाने कितने बच्चों के भविष्य को रौंद चुके हो तुम। न जाने कितने माँ बाप को खून के आंसू रुला चुके हो तुम। तुम्हे किसने यह अधिक
10 जून 2016
20 जून 2016
यो
उसका नाम है रामदीन. वह भी ''योगासन'' करना चाहता है पर अभी वह ''भूख-आसन'' का शिकार है. उसे देख कर यह कविता बनी  -भूखे को रोटी भी दे दो,फिर सिखलाना योग .बड़ा रोग है एक गरीबी, चलो भगाएं रोग.खा-पीकर कुछ अघा गए हैं, अब सेहत की चिंता जो भूखे हैं उन लोगो को कौन यहां पर गिनता। पहले महंगाई से निबटो, भ्रष्टाचा
20 जून 2016
06 जून 2016
रा
सपा-बसपा आैर भाजपा,कांग्रेस चुनाव में लगे हैं |जनता की सुध- बुध छोड़कर फार्चूनर लिए भगे हैं |चुनाव के वक्त झूठा वादा करके,जनता को बेवकूफ बनाते हैं|कुर्सी पाते ही वादा भूलकर,रेस्टोरेन्ट में खाना खातें हैं|एेसे तो हो गया देश का कल्याण|
06 जून 2016
11 जून 2016
पा
पानी  बचाना चाहिए फेंका बहुत पानी अब उसको बचाना चाहिए। सूखे जर्द पौधों को अब जवानी चाहिए। वर्षा जल के संग्रहण का अब कोई उपाय करो। प्यासी सुर्ख धरती को अब रवानी चाहिए। लगाओ पेड़ पौधे अब हज़ारों की संख्या में। बादलों को अब मचल कर बरसना चाहिए। समय का बोझ ढोती शहर की सिसकती नदी है। इस बरस अब बाढ़ में इसको
11 जून 2016
09 जून 2016
रोटी की सही कीमत जानता है ,भूख से बिलबिलाता बदहाल बेसहारा बच्चा ,ढूंढ रहा है जो होटल के पास पड़ी झूठन में रोटी के चन्द टुकड़े,जिन्हें खाकर बुझा सके वो अपने उदर की आग को ,जिसकी तपन से झुलस रहा है उसका कोमल, कुपोषित ,कमजोर बदन |झपट पड़ा था जो फैंकी गयी झूठन पर उस कुते से प
09 जून 2016
07 जून 2016
कि
किसान अपने खेत की तैयारी के बाद बीज के लिए सरकारी बीज गोदाम की ओर दो लाभ प्राप्त करने की उम्मीद से जाता है।एक सरकारी अनुदान और फाउंडेशन सीड में कम बीमारी का दावा।मगर वास्तव में उसे दोनों में छलाबा ही मिलता हैन तो कोई अनुदान की गारंटी है और न ही उच्च गुणवत्ता के बीज की।खरीफ में धान के बीज की पौध डाली
07 जून 2016
27 जून 2016
वो
मेरी याद दिल से भुलाओगे  कैसे,गिराकर नज़र से उठाओगे कैसे|सुलगने ना दो ज़िन्दगी को ज्यादा,चिरागों से घर को बचाओगे  कैसे  
27 जून 2016
23 जून 2016
दे
देश वासी देश की तरक्कीमे सहयोग करें ============================आरक्षण जैसी कई बीमारिया की वजह से टीना डाभी पास हुई और अंकित श्री वास्तव फेल जो की अंकित कोsahyog तिनसे ज्यादा मार्क्स है ३५ मार्क ज्यादा लेकिन अंकित को आरक्षण व्यवस्ताने फेल करदिया और तिनको पास , ये बिमारिकि जड़ देश में डालने वाला नहेरु
23 जून 2016
06 जून 2016
पर्यावरण संरक्षण सर्वोत्तम मानवीय संवेदना सुशील शर्मा मनुष्य और पर्यावरण का परस्पर गहरा संबंध है।अग्नि , जल, पृथ्वी , वायु और आकाश यही किसी न किसी रूप में जीवन का निर्माण करते हैं, उसे पोषण देते हैं। इन सभी तत्वों का सम्मिलित , स्वरूप ही पर्यावरण है। पर्यावरण संरक्षण पाँच स्तरों पर सम्भव होगा-1- मान
06 जून 2016
12 जून 2016
ना
नारी तुम मुक्त हो।नारी तुम मुक्त हो। बिखरा हुआ अस्तित्व हो। सिमटा हुआ व्यक्तित्व हो। सर्वथा अव्यक्त हो। नारी तुम मुक्त हो।शब्द कोषों से छलित देवी होकर भी दलित। शेष से संयुक्त हो। नारी तुम मुक्त हो।ईश्वर का संकल्प हो।प्रेम का तुम विकल्प हो। त्याग से संतृप्त हो। नारी तुम मुक्त हो
12 जून 2016
27 जून 2016
दे
देश हमारा बदल रहा हैदेश हमारा बदल रहा हैधीरे धीरे संभल रहा है दुनिया में खुद को साबित करने कोयुवा हदृय फिर मचल रहा है।।गॅाव -गाॅव और शहर -शहर में परिवर्तन का दौर चला हैंऐसा लगता है मानोदेश हमारा दौड़ पडा है।।नये अन्वेषण,नये लक्ष्य सेप्रतिपल भारत बदल रहा हैउन्नत तकनीको के प्रयोग सेकृषि जगत भी संभल रहा
27 जून 2016
11 जून 2016
बड़े खुश हैं हम बादल गुजर गया लेकिन बरसा नहीं। सूखी नदी हुआ अभी अरसा नहीं। धरती झुलस रही है लेकिन बड़े खुश हैं हम। नदी बिक रही है बा रास्ते सियासत के। गूंगे बहरों के  शहर में बड़े खुश हैं हम। न गोरैया न दादर न तीतर बोलता है अब। काट कर परिंदों के पर बड़े खुश हैं हम। नदी की धार सूख गई सूखे शहर के कुँए। ता
11 जून 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x