लौहपथगामिनी! लौहपथगामिनी! लौहपथगामिनी! - राम लखारा 'विपुल'

14 जून 2016   |  राम लखारा   (271 बार पढ़ा जा चुका है)

लौहपथगामिनी! लौहपथगामिनी! लौहपथगामिनी! - राम लखारा 'विपुल'

मारवाड़ जंक्शन रेल का शहर है इसने मारवाड़ को 3 भागों में बांट दिया है। 


एक हिसाब से इसने यह ठीक ही किया। 

शहर के बीचो बीच में ही रेल फाटक बंद होने पर इस भागदौड़ भरे जीवन में मजबूरी  में ही सही हर इंसान को  कुछ देर रूक कर अपनी थकान मिटाने का समय मिलता हैै।


जितनी भली रेल है, भारतवर्ष में उतना भला आज के दौर में कोई भी नहीं।

इसने जीवन चाहने वालो को जीवन दिया है और मौत चाहने वालों को मौत।


खुले दिल और मुक्त हस्त से इसने लुटाया है।

हर किसी के लिए 24×7 घंटे उपलब्ध मुफ्त का सबसे बड़ा शौचालय, पियक्कड़ों का सबसे बड़ा मैखा़ना, अधूरे आशिकों की खुन्नस की सबसे बड़ी डायरी, नीम हकीमों का सबसे बड़ा विज्ञापन बोर्ड, हजारों भिखारियों का भिक्षास्थल और लाखों फोकट बाबाओं का निःशुल्क वाहन!!!!


निःशुल्क!  निस्वार्थ!  इससे ज्यादा भला कोई क्या देगा?


लौहपथगामिनी! लौहपथगामिनी! लौहपथगामिनी!


तुम्हारे पैर भले लोहे के हो, मगर दिल सोने का है!  


‪#‎भारत_दर्शन_भूले_ भटके‬

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