अपना लहू बहा देंगे(कविता)"ये वतन"पुस्तक

14 जून 2016   |  अवनीश कुमार मिश्रा   (181 बार पढ़ा जा चुका है)

वीर जवां हूँ इसी वतन का
इस देश को न झुकने देंगे
लेकर हाँथों में खड़ग ,
सर काटेंगे ,कटवा भी लेंगे
कट जाऐंगे सर फिर भी ,
आखिर तक लड़ते रहेंगे
हम अपने वतन के खातिर अपना लहू बहा देंगे|

भारतवासी हैं हम सब जन
गैर गुलामी नहीं सहेंगें
बर्छी और भाले लेकर
हम बिना खड़ेदे नहीं रहेंगें
गर नहीं खड़ेदे दुश्मन को ,
तो दुनिया वाले कापुरुष कहेंगें
हम अपने वतन के खातिर अपना लहू बहा देंगे ||

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