अवारा बन गया (शायरी)"दर्दीला-इश्क"पुस्तक

14 जून 2016   |  अवनीश कुमार मिश्रा   (193 बार पढ़ा जा चुका है)

तेरी यादों के बिस्तर पर मैं सो गया
तेरी बिस्तर के खुश्बू में मैं खो गया
मगर तुमने मुझसे घृणा की इस कदर ,
मैं तेरी तेरी बेवफाई में अवारा बन गया |

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