जवानी में (शायरी)"दर्दीला-इश्क"पुस्तक

14 जून 2016   |  अवनीश कुमार मिश्रा   (230 बार पढ़ा जा चुका है)

तेरे प्यार में मरता रहा मैं
तेरे इश्क के लिए भटकता रहा मैं
तू ने मेरे प्यार पर मार दिया ठोकर ,
भरी जवानी में तड़पता रहा मैं |

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