जवानी में (शायरी)"दर्दीला-इश्क"पुस्तक

14 जून 2016   |  अवनीश कुमार मिश्रा   (231 बार पढ़ा जा चुका है)

तेरे प्यार में मरता रहा मैं
तेरे इश्क के लिए भटकता रहा मैं
तू ने मेरे प्यार पर मार दिया ठोकर ,
भरी जवानी में तड़पता रहा मैं |

अगला लेख: कुर्सी का खेल (व्यंग)



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
16 जून 2016
हमारे देश में पहले की तुलना में अब बहुत कम वन रह गयें है इसका सबसे बड़ा कारण है बढ़ती आबादी और स्मार्टता ,और अन्य कारण भी है |हमारे देश के वासी दूसरों की कापी करने में बहुत आगे रहते हैं |इसी का नतीजा है कि आयुर्वेदिक को छोड़कर अंग्रेजी दवाईयां प्रयोग करते हैं |लेकिन वन काट दिये तो जड़ी -बूटियाँ कहाँ
16 जून 2016
12 जून 2016
आज हमारे देश में पहले जैसी बात नही रही हमारे देश का का संविधान है संविधान में बाल श्रम कराने वाले को अपराधी माना जाता है फिर भी हमारे देश में बहुत से आदमी ऐसे हैं जो आज भी बाल श्रम कराते है और उन्हें कानून से तनिक भी ड़र नही लगता |बहुत बच्चे ऐसे भी जो मजबूरी में श्रम करतें है उन्हें न किसी सरकारी यो
12 जून 2016
11 जून 2016
हम अपने इलाकों में बहुत दिन से सुन रहे हैं कि यहाँ भट्ठी चलती है मैने एक आदमी से पूँछने की कोशिश की पर वह कुछ न बोला |मैं तो कुछ अधिक न जान सका |लेकिन कुछ अादमियों ने बताया कि सचमुच यहाँ शराब बनती है उन्होंने बताया अपने इलाके में और कईं भट्ठियाँ हैं कुछ लोगो ने बताया कि यहाँ पुलिस वाले आकर दारू पीते
11 जून 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x