लाज है नारी का गहना

15 जून 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (260 बार पढ़ा जा चुका है)

@लाज है नारी का गहना,इसका मत व्यापार करो@

*******************************************************

नारी जिस्म-फ़रोशी का , बन्द यह बाजार करो ।

लाज है नारी का गहना,इसका मत व्यापार करो ॥

नारी के जिन उरोजों पर,शिशुओं का होता है अधिकार।
मिलती है जिनसे उनको , उज्ज्वल पावन जीवन-धार॥
सरे आम उघाड़ कर उनको , न उन पे अत्याचार करो।
लाज है नारी का गहना , इसका मत व्यापार करो ॥
नारी के पावन अंगों को , मत हथियार बनाओ तुम।
नारी के कुच-कलशों से , न वासना भड़काओ तुम ॥
नारी-तन का बाजार लगा कर,न अस्मत को तार-तार करो।
लाज है नारी का गहना ,इसका मत व्यापार करो॥
चेते नारी, जागे नारी , पर लाज न कभी छोड़े नारी।
सौदा नही करे शर्म का,चाहे रकम-प्रसिध्दि मिले भारी ॥
श्रद्धा की पात्र बनी रहो तुम ,न वासना का प्रचार करो ।
लाज है नारी का गहना, इसका मत व्यापार का करो ॥
*********************************************************

अगला लेख: नकारे नेता



Kokilaben Hospital India
08 मार्च 2018

We are urgently in need of kidney donors in Kokilaben Hospital India for the sum of $450,000,00,For more info
Email: kokilabendhirubhaihospital@gmail.com
WhatsApp +91 779-583-3215

अधिक जानकारी के लिए हमें कोकिलाबेन अस्पताल के भारत में गुर्दे के दाताओं की तत्काल आवश्यकता $ 450,000,00 की राशि के लिए है
ईमेल: kokilabendhirubhaihospital@gmail.com
व्हाट्सएप +91 779-583-3215

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
25 जून 2016
ना
सूर्य में कितनी ऊर्जा है ये उसे नहीं पता ,चन्द्रमा में कितनी शीतलता है ये उसे नहीं पता ,फूल अपनी सुगंध से अवगत नहीं है ,हीरा अपने मूल्य से अंजान है                                                                                                                                                         
25 जून 2016
24 जून 2016
का
@@@@@@@@@@@@@@@@@@कायरता को छोड़ बन्दे , हौसले का गर्जन कर |नाम अमर हो जाये तेरा , ऐसा तू सृजन कर ||कूच कर गये लोग करोड़ों बिना किसी पहचान के,कयामत त्तक ख़तम न हो, तू ऐसा अर्जन कर ||@@@@@@@@@@@@@@@@@@
24 जून 2016
12 जून 2016
ना
नारी तुम मुक्त हो।नारी तुम मुक्त हो। बिखरा हुआ अस्तित्व हो। सिमटा हुआ व्यक्तित्व हो। सर्वथा अव्यक्त हो। नारी तुम मुक्त हो।शब्द कोषों से छलित देवी होकर भी दलित। शेष से संयुक्त हो। नारी तुम मुक्त हो।ईश्वर का संकल्प हो।प्रेम का तुम विकल्प हो। त्याग से संतृप्त हो। नारी तुम मुक्त हो
12 जून 2016
18 जून 2016
सामान्यतः मनुष्यों को जल, भाफ, अग्नि, विद्युत, वायु, गैस आदि की शक्ति का तो अनुभव हुआ करता है, परन्तु ‘शब्द’ में भी कोई ऐसी शक्ति होती है, जो स्थूल पदार्थों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सके, इस पर उनको शीघ्र विश्वास नहीं होता। वे यह तो मान सकते हैं कि मधुर शब्दों से श्रोता का चित्त प्रसन्न होता है कठोर श
18 जून 2016
19 जून 2016
आज पुरुष और नारी समानता का युग होने के बावज़ूद, अभी भी नारी अत्याचार की इतनी घिनौनी कुप्रथाएं मौजूद है कि जिन्हें जानकर आप दाँतों तले उंगली दबा देंगे। नारी अत्याचार की क्रृरतम कुप्रथाएं | आपकी सहेली ज्योति देहलीवाल
19 जून 2016
17 जून 2016
@@@@@@@@ नकारे नेता @@@@@@@@***************************************************पाचन शक्ति इनकी देख कर ,लगता ये इन्सान नहीं हैं |चारा,कोयला ,खाद यूरिया , इन्सानों का खान नहीं हैं ||इनके बयानों को सुनकर ,लगता इनको ज्ञान नहीं है |हक़ की बातें करते सारे ,कर्त्तव्य की पहचान नहीं है ||कायरता इनकी देख कर ,ल
17 जून 2016
23 जून 2016
भा
राष्ट्र भक्ति से परिपूर्ण कविता - @@@@@@@@भारत का नव निर्माण@@@@@@@@ पाखंडियों की पोल खोले हम ,सज्जनों का हम कल्याण करें | आओ साथियों हम सब मिलकर ,भारत का नव निर्माण करें|| सीमाओं को हम खून से सींचे ,और सींचे खेत पसीने से | दुश्मन को हम धूल चटा दें ,दोस्त को लगाए सीने से || बलात्कारी को बधिया करदे ,
23 जून 2016
18 जून 2016
सामान्यतः मनुष्यों को जल, भाफ, अग्नि, विद्युत, वायु, गैस आदि की शक्ति का तो अनुभव हुआ करता है, परन्तु ‘शब्द’ में भी कोई ऐसी शक्ति होती है, जो स्थूल पदार्थों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सके, इस पर उनको शीघ्र विश्वास नहीं होता। वे यह तो मान सकते हैं कि मधुर शब्दों से श्रोता का चित्त प्रसन्न होता है कठोर श
18 जून 2016
15 जून 2016
सृष्टि और समाज की कमियों व विसंगतियों पर कटाक्षकरती हास्य कविता -@@@-अनूठा सपना-@@@*********************************************************झूठ -कपट और बेईमानी देख ,मैं बहुत उदास था |भ्रष्टाचार भरा संसार मुझको ,आया नहीं रास था ||उड़ जाते हैं बाल सर के ,पर बेकार बाल तंग करते |ढल जाता तन बुढ़ापे में ,वै
15 जून 2016
24 जून 2016
@@@@@@ परिस्थिति का प्रभाव @@@@@@ *********************************************************** परिस्थिति किसी काम को ,कितना बदल देती है | एक जगह जो समस्या होती ,हल दूजी जगह कर देती है || जाती -रंजिश से की गयी हत्या,सजा का कारण बनती है | पर सीमा पर दुश्मन की हत्या,सम्मान की वजह बनती है || जो काम निज प
24 जून 2016
21 जून 2016
@@@@@@@@@@@@@ बहू से बन गयी बेटी @@@@@@@@@@@@@************************************************************************************रोज सुबह घूमने जाने वाले सम्पत जी आज अभी तक सो रहे थे | उनकी बहू ने यह सोचा कि उनकी तबीयत ठीक नही होगी | कमरे की सफाई के दौरान बहू के हाथ से तिपाई पर रखा उनका चश्मा फर्श
21 जून 2016
18 जून 2016
@@@@@@@-अनमोल आजादी -@@@@@@@************************************************************सन अठारह सौ सतावन का .वो वक्त बहुत अनूठा था |जन -विद्रोह का ज्वालामुखी ,जब भारत में फूटा था ||भारतीयों ने अंग्रेजों के संग ,जब खुनी होली खेली थी |अंग्रेज जिसको ग़दर कहते ,वो आजादी की जंग पहली थी ||सुहागिनों ने सुह
18 जून 2016
21 जून 2016
ना
@@@@@@@@- नारी- @@@@@@@@इस दुनिया की शोभा है , इस दुनिया की रौनक है |खुश रखें सदा इसको ,रचा कुदरत ने है जिसको ||जिसकी दीवानी सृष्टि सारी,वो नारी है कहलाती |बुझे -बुझे मर्दों का मन ,नारी ही तो बहलाती ||घर में पायल खनकाती ,मन का मोर नचवाती |पतली कमर लचकाती ,प्यार में आकर इठलाती ||इस दुनिया की शोभा है
21 जून 2016
09 जून 2016
लू
रिश्वत खोरी पर व्यंग करती कविता -लूट की छूट लूट कर यात्रियों को लूटेरों ने ,लौटा दिया सारा धन -माल |सोचने लगे यात्री सारे ,क्या है यह कोई इनकी चाल ?|डर रहे थे सब यात्री ,पर एक बालक बोला करते खाज |डाकू सर प्लीज बताओ , इस दया का क्या है राज ?|डाकू बोला ,यह दया नहीं है ,यह है रिश्वत का सवाल |हर लूट पर
09 जून 2016
21 जून 2016
@@@@@ इच्छा शक्ति का प्रभाव @@@@@**********************************************पत्थर समझा जाकर जो, हीरा ठोकरे खाता है |पहचाना जाने पर वो , ताज में सजाया जाता है ||नामी लोगों की अकविता भी ,छप जाती अखबार में |पर छुपे विश्व -कवि की रचना ,मिलती है भंगार में ||आँख उठा कर नहीं देखता कोई ,चाहे प्रतिभा भरपू
21 जून 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x