लाज है नारी का गहना

15 जून 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (283 बार पढ़ा जा चुका है)

@लाज है नारी का गहना,इसका मत व्यापार करो@

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नारी जिस्म-फ़रोशी का , बन्द यह बाजार करो ।

लाज है नारी का गहना,इसका मत व्यापार करो ॥

नारी के जिन उरोजों पर,शिशुओं का होता है अधिकार।
मिलती है जिनसे उनको , उज्ज्वल पावन जीवन-धार॥
सरे आम उघाड़ कर उनको , न उन पे अत्याचार करो।
लाज है नारी का गहना , इसका मत व्यापार करो ॥
नारी के पावन अंगों को , मत हथियार बनाओ तुम।
नारी के कुच-कलशों से , न वासना भड़काओ तुम ॥
नारी-तन का बाजार लगा कर,न अस्मत को तार-तार करो।
लाज है नारी का गहना ,इसका मत व्यापार करो॥
चेते नारी, जागे नारी , पर लाज न कभी छोड़े नारी।
सौदा नही करे शर्म का,चाहे रकम-प्रसिध्दि मिले भारी ॥
श्रद्धा की पात्र बनी रहो तुम ,न वासना का प्रचार करो ।
लाज है नारी का गहना, इसका मत व्यापार का करो ॥
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