आत्मा एवं धर्म

18 जून 2016   |  देवेन्द्र प्रसाद   (131 बार पढ़ा जा चुका है)

धर्मेण सह यात्रां करोत्यात्मा, न बान्धवैः |

आत्मा धर्माधर्मरूप कर्मों के साथ यात्रा करता है, न कि बन्धु-बान्धवों के साथ ।

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