स्वप्नलोक की सच्चाई

18 जून 2016   |  देवेन्द्र प्रसाद   (241 बार पढ़ा जा चुका है)

स्वप्नों और अदृश्य प्रेरणाओं द्वारा जिन व्यक्तियों को किन्हीं महत्वपूर्ण विषयों की प्रेरणा प्राप्त होती है, उन सबकी यही सम्मति है कि जिन व्यक्तियों में पारस्परिक हार्दिक प्रेम, स्नेह होता है, वे दूर रहते हुए भी एक-दूसरे के सुख-दुःख की जानकारी प्राप्त कर लेते हैं। युद्ध में जो व्यक्ति मारे जाते हैं, उनमें से अनेकों के देहान्त की सूचना किसी अदृश्य और अज्ञात शक्ति द्वारा उनके प्रिय-जनों को मिल सकती है। इस तरह के उदाहरण योरोप में भी बहुत से मिल चुके हैं, यद्यपि वहाँ कि निवासी ईसाई धर्म के सिद्धाँतों के कारण मृत व्यक्तियों की आत्मा के स्वतंत्र रूप से कहीं आने-जाने में विश्वास नहीं रखते। तो भी जिन लोगों के साथ ऐसी घटनायें होती हैं, वे उसका कारण किसी अलौकिक शक्ति को ही मानते हैं।

हाल ही में अमरीका की ‘चमत्कारी और गूढ़ घटनाओं’ की जाँच करने वाली संस्था ने इस प्रकार की जिन बहुसंख्यक घटनाओं का वर्णन एकत्रित किया है, उससे भी इस मान्यता की सचाई सिद्ध होती है। उन्होंने एक स्कूल मास्टर का हाल बतलाया है, जो अपनी माँ के घर से 30 मील के फासले पर एक कस्बे में नौकरी करता था। एक दिन सुबह ही उसके मन में यह विचार आया कि उसकी माँ बीमार है और उसकी याद कर रही है। उसने माँ के गाँव जाने का निश्चयकर लिया। पर उस समय वहां के लिये कोई सवारी नहीं मिल सकती थी। इसलिये उसने अपने दामाद को टेलीफोन करके अपनी मोटर लाने को कहा। दामाद ने कहा कि “इस समय मौसम बड़ा खराब है और तूफान आने वाला है” पर मास्टर को अपनी माँ के विषय में ऐसी प्रेरणा हो रही थी कि उसने अत्यंत आग्रह करके दामाद को बुला ही लिया। रास्ते में उनको भयंकर तूफान का सामना करना पड़ा। जब वे घर पहुँचे तो माँ वास्तव में बहुत बीमार थी और इन लोगों के प्रयत्न से बड़ी कठिनाई से उसकी प्राण रक्षा हो सकी।

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