नारी

21 जून 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (187 बार पढ़ा जा चुका है)

@@@@@@@@- नारी- @@@@@@@@

इस दुनिया की शोभा है , इस दुनिया की रौनक है |

खुश रखें सदा इसको ,रचा कुदरत ने है जिसको ||

जिसकी दीवानी सृष्टि सारी,वो नारी है कहलाती |

बुझे -बुझे मर्दों का मन ,नारी ही तो बहलाती ||
घर में पायल खनकाती ,मन का मोर नचवाती |
पतली कमर लचकाती ,प्यार में आकर इठलाती ||
इस दुनिया की शोभा है , इस दुनिया की रौनक है |
खुश रखें सदा इसको ,रचा कुदरत ने है जिसको ||
पुरुष को जो प्यारा है , औरत वो सहारा है |
विलक्षण वो अदाकारा है ,मर्द उसी का मारा है ||
सुन्दरता उसकी बढ़ जाती ,जब कभी वो शर्माती |
जब जब सुर में वो गाती,कोयल की बोली याद आती ||
इस दुनिया की शोभा है , इस दुनिया की रौनक है |
खुश रखें सदा इसको ,रचा कुदरत ने है जिसको ||
बहिन बीवी या हो भाभी ,सहेली हो या हो साली |
नारी की रौनक के बिन ,जीवन लगता है खाली ||
नारी के बिन घर-आँगन में,नहीं गूँजती किलकारी |
नारी के बलबूते पर ही ,चलती है गृहस्थी सारी ||
इस दुनिया की शोभा है , इस दुनिया की रौनक है |
खुश रखें सदा इसको ,रचा कुदरत ने है जिसको ||
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08 मार्च 2018

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