योग जीवन का आधार है

21 जून 2016   |  प्रिंस सिंघल   (1537 बार पढ़ा जा चुका है)

योग भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण  वीध्या है. योग से हमारा सर्वांगीण, शरीरिक, मानसिक, बौद्धिक, व्यवहारिक विकास होता है. योग जीवन जीने की कला है, जिसे सीखकर व्यक्ति स्वस्थ रहता है, जीवन में सफल होता है. जीवन दिव्य बनाता है और अपना भाग्य बदलने में सक्षम होता है. योग सर्वांगीण विकास करने वाली कला है, इससे चरित्र में सुधार, चेहरे पर तेज़, वाणी में मधुरता, कार्य में कुशलता, रोगों से मुक्ति, तनाव रहित और प्रसन्नता पूर्ण जीवन जीया जा सकता है. योग के द्वारा पारिवारिक जीवन में बेहतर तालमेल किया जा सकता है, बुरी आदतों को योग के द्वारा छोड़ा जा सकता है. योग नकारात्मक विचारों से सकारात्मक विचार बनाता है जिससे हम निराशा, हताशा, अवसाद और कुंठा से बच सके और आशा और उत्साहपूर्वक जीवन जी सकें.<br>

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समाधानाय सौख्याय निरोगत्वाय जीवने।
योगमेवाभ्यसेत प्राज्ञ: यथाशक्ति निरंतरम्।।
(परम पूज्य जनार्दन स्वामी )
जनार्दन स्वामी योगाभ्यासी मंडल, नागपुर
सादर समर्पित
योगाभ्यासी अरविंद लोंढे (योगारविंद ) -9423073496

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