अवारा बन गया (शायरी)"दर्दीला-इश्क"पुस्तक

21 जून 2016   |  अवनीश कुमार मिश्रा   (137 बार पढ़ा जा चुका है)

तेरी यादों के बिस्तर पर मैं सो गया ,तेरे बिस्तर के खुशबू में मै खो गया , मगर तुमने घृणा की मुझे इस कदर ,मैं तेरे बेवफाई में अवारा बन गया |

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