भारत का नव निर्माण

23 जून 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (234 बार पढ़ा जा चुका है)

राष्ट्र भक्ति से परिपूर्ण कविता - @@@@@@@@भारत का नव निर्माण@@@@@@@@ पाखंडियों की पोल खोले हम ,सज्जनों का हम कल्याण करें | आओ साथियों हम सब मिलकर ,भारत का नव निर्माण करें|| सीमाओं को हम खून से सींचे ,और सींचे खेत पसीने से | दुश्मन को हम धूल चटा दें ,दोस्त को लगाए सीने से || बलात्कारी को बधिया करदे ,भ्रष्ट का बहिष्कार करें | बईमानी को गाड़ दें गहरा , ईमान का सत्कार करें || जाग उठो तुम देशवाशियों ,यह समय नहीं है सोने का | नहीं समय यह जिन्दगी को ,खेल खेल में खोने का || यह समय है गद्दारों को , उनकी औकात बताने का | व भ्रष्ट नेताओं के चंगुल से ,भारत को बचाने का || मत भूलो तुम भगत सिंह की ,कुर्बानी के कर्जदार हो | पति पिता पुत्र के संग ,भारत के सेवादार हो || तुम हो वीर प्रताप के वंशज ,तुम देश के कर्णधार हो | तुम हो इस देश के प्रहरी , तुम जीत का हार हो || नहीं जरुरत देश भक्ति के लिए ,सीमा पर सबको जाने की | और वीर कहलाने खातिर ,दुश्मन की गोली खाने की || जरुरत है देश में जमे हुए ,भ्रष्टों को औकात बताने की| नहीं सहन बेईमानी हमको ,यह बात उन्हें जताने की || चीन -पाक तो हैं विदेशी दुश्मन ,मूल दुश्मन तो देशी है | जो खाता हराम की रोटी ,वो दुश्मन देश का बेशी है || न रखें हम भ्रष्टों से रिश्ता ,उनका पूर्ण बहिष्कार करें | न दें बहिन - बेटी उनको ,न आँखें उनसे चार करें || न दे वोट किसी दागी को ,न उसका कभी सम्मान करे | छोड़ दे भ्रष्ट बेईमानी को , इतना उसे हलकान करें || पाखंडियों की पोल खोले हम ,सज्जनों का हम कल्याण करें | आओ साथियों हम सब मिलकर ,भारत का नव निर्माण करें|| आओ साथियों तन मन धन से ,भारत का शुभ निर्माण करें |

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