कालजयी सृजन

24 जून 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (73 बार पढ़ा जा चुका है)

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कायरता को छोड़ बन्दे , हौसले का गर्जन कर |

नाम अमर हो जाये तेरा , ऐसा तू सृजन कर ||

कूच कर गये लोग करोड़ों बिना किसी पहचान के,

कयामत त्तक ख़तम न हो, तू ऐसा अर्जन कर ||
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