वो अँधेरे से उजाला माँग बैठा, बहुत भूखा था निबाला मांग बैठा|

27 जून 2016   |  अवधेश प्रताप सिंह भदौरिया 'अनुराग'   (436 बार पढ़ा जा चुका है)


मेरी याद दिल से भुलाओगे  कैसे,

गिराकर नज़र से उठाओगे कैसे|


सुलगने ना दो ज़िन्दगी को ज्यादा,

चिरागों से घर को बचाओगे  कैसे  

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उत्तम.

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