कुर्सी महिमा

27 जून 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (98 बार पढ़ा जा चुका है)

सत्ता यानी कुर्सी के बिना एक राजनेता की दशा का चित्रण करता गीत - ************************************************************************ तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | ज्यों अकल बिन इन्सान जिया |ज्यों आदर बिन मेहमान जिया || ज्यों हिन्दी बिन हिन्दुस्तान जिया |ज्यों भक्त बिना भगवान् जिया || और साली बिन,और साली बिन, ज्यों सुसराल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | ज्यों जेब बिना कोई दाम जिया |ज्यों दफ्तर बिन कोई काम जिया || ज्यों काम बिना कोई दाम जिया |ज्यों खास बिना कोई आम जिया || सिक्कों के बिन,सिक्कों के बिन , ज्यों टकसाल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | ज्यों होली ,बिन रंग जिया |ज्यों नशे के बिन भंग जिया || ज्यों केश के बिन बैंक जिया ,ज्यों बिन तरल के टैंक जिया || नेता बिन ,नेता बिन ,ज्यों हड़ताल कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | ज्यों ताली के बिन कव्वाली का |ज्यों गोली के बिन दुनाली का || ज्यों जीजे के बिन साली का |ज्यों झगड़े के बिन गाली का || बिन नमक के ,बिन नमक के ,ज्यों दाल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | खादिम बिन जैसे अल्ला है |नगदी बिन जैसे गल्ला है || पारखी के बिन कला है |झगड़ें के बिन जैसे हल्ला है || बिन पतों के ,बिन पतों के , ज्यों डाल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | तेरे बिन ,तेरे बिन ,अपना हाल | कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ ,कुर्सी तुम्हे क्या बतलाऊँ | ******************************************************

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