नीति की बातें

28 जून 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (251 बार पढ़ा जा चुका है)

@@@@@@@@@ नीति की बातें @@@@@@@@@ ***************************************************************** सत्य,सेहत और सिध्दान्तों से ,समझौता नहीं करना चाहिए | जितना हो सके हम को ,दुख दूजों के हरना चाहिए || देश हित के लिए सदा ,काम हमें करना चाहिए | सही पथ पर चलते हुए ,हमें नहीं डरना चाहिए || सन्तुलित और सात्विक भोजन ,हमें सदा करना चाहिए | पर ठूंस -ठूंस कर पेट कभी ,नहीं हमें भरना चाहिए || प्रतिभाशाली व्यक्तियों से ,द्वेष नहीं करना चाहिए | दिल से दाद देकर उनको ,जोश नया भरना चाहिए || सत्य, सार्थक वाणी बोलें ,पर नहीं कभी बकना चाहिए | जी भर देखे सुन्दरता को ,पर नहीं कभी तकना चाहिए || अपने घर के भेदों को ,हमें सदा ढकना चाहिए | अनुभवों की मंद आँच पर ,ज्ञान हमारा पकना चाहिए || जल्दी सोयें रात को ,और सुबह जल्दी जगना चाहिए | किसी भ्रम को पाल कर ,नहीं खुद को ठगना चाहिए || न्याय करो ती ऐसे करो ,कि न्याय हुआ लगना चाहिए | अपनी जिम्मेदारियों से ,नहीं हमें भगना चाहिए || परहेज रख कर जीवन में ,रोगों से हमें बचना चाहिए | दुबारा भोजन करने से पहले ,खाया भोजन पचना चाहिए || जश्न मनाएं त्योहारों पर , पर नहीं शोर मचना चाहिए | करके अनूठा काम जगत में ,इतिहास नया रचना चाहिए || दूजों के दुःख को देख कर ,नीर नैनों से बहना चाहिए | जीवन में आये संकटों को, धार धीरज सहना चाहिए || कर्ज लिया हो अगर किसी से ,तो बिन माँगे भरना चाहिए | अगर सही है दुर्गेश की बातें ,तो याद उसे करना चाहिए || ***********************************************

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