शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
16 जुलाई 2016
व्यक्तित्व का निर्माण मूल रूप से विचारों पर निर्भर है। चिन्तन मन के साथ-साथ शरीर को भी प्रभावित करता है। चिन्तन की उत्कृष्टता को व्यवहार में लाने से ही भावात्मक व सामाजिक सामंजस्य बनता है। हमारे मन की बनावट ऐसी है कि वह चिन्तन के लिए आधार खोजता है। चिन्तन का जैसा माध्यम होगा वैसा ही उसका स्तर होगा।न
16 जुलाई 2016
17 जुलाई 2016
1. झाबर      क-तालाब   ख-पोखर   ग-दलदल     2. झिल्लड़  क-पापड़ ख-झीना ग-झिल्ली   3. झीमर  क-मल्लाह ख-कीड़ा    ग-झूमना    4. झुटुंग        क-मल्लाह  ख-भ्रम    ग-जटाधारी   उत्तर 1. ग   2. ख 3. क 4. ग
17 जुलाई 2016
13 जुलाई 2016
1. झुठकाना   क-झूठ बोलना ख-गोबरग-भ्रम में डालना  2.झौर क-गन्‍दगी  ख-समूह ग-झटका 3. टल्‍लेबाजी  क-बहानेबाजी   ख-कीड़ा ग-झूमना 4. टसुआ     क-टेसू के फूल ख-भारी वस्तु  ग-आंसू  उत्तर 1. ग   2. ख 3. क 4. ग
13 जुलाई 2016
17 जुलाई 2016
    जब कोई व्यक्ति मृत्यु शय्या पर पड़ा होता है, किसी असाध्य रोग से पीड़ित होता है, ऊपरी प्रभाव या हवाओं से निरन्तर रोगग्रस्त रहता है या अचानक दुर्घटना के कारण मृत्यु की घड़ियां गिन रहा होता है तो कहते हैं कि महामृत्युंजय मन्त्र का पाठ करा लो। इससे मृत्यु भी टल जाती है।    मन्त्र के लिए कह सकते हैं
17 जुलाई 2016
26 जून 2016
     मन की गति बहुत तेज है। पलक झपकते इधर-उधर घूम आता है। कभी इधर जाता है तो कभी किधर जाता है। मन की गति पर लगाम लगाना ही मन को एकाग्र करना है। जो लगाम लगा लेते हैं वे ही कुछ हटकर करते हैं, बाकी सब तो लकीर के फकीर हैं उनका काम रोज की दिनचर्या पूरा करके सो जाना है और अगले दिन नित्य कर्म से निपटकर पुन
26 जून 2016
25 जून 2016
ज्ञान से बुद्धि विवेक सम्मत बनती है और व्यक्ति विवेकी बन जाता है। विवेकी हर परिस्थिति में नीरक्षीरविवेक की स्थिति में रहता है और सदैव सही सलाह देता है और उसकी सलाह निष्पक्ष और उन्नति कारक होती है जो जीवन निखारती है।
25 जून 2016
26 जून 2016
     ध्‍ार्म शब्‍द धृत धातु से बना है जिससे तात्‍पर्य है कि धारण करना। नित्‍य अच्‍छा स्‍वाध्‍याय करेंगे यह संकल्‍प लेकर उस नियम का पालन करेंगे तो यह भी धार्मिक होना है। दूजों की सहायता का संकल्‍प लेकर धारण कर लेंगे अौर उस पर चल पड़ेंगे तो यह सहायता करने का धर्म भी आपका हो जाएगा। इस प्रकार आप कितने भ
26 जून 2016
25 जून 2016
    सूर्योपनिषद अथर्ववेदीय परम्परा से संबंध रखता है। इस उपनिषद में आठ श्लोकों में ब्रह्मा और सूर्य की अभिन्नता वर्णित है और बाद में  सूर्य  व  आत्मा  की अभिन्नता प्रतिपादित की गई है। इस उपनिषद के पाठ के लिए हस्त नक्षत्र स्थित सूर्य का समय अर्थात् आश्विन मास सर्वोत्तम माना गया है।  इसके पाठ  से व्यक्
25 जून 2016
14 जुलाई 2016
आज का सुवचन  
14 जुलाई 2016
13 जुलाई 2016
आज फ्रेंडशिप डे नहीं पर ना जाने क्यों तुम्हे याद करने का बड़ा मन हो रहा । शायद मैं एक बुरा दोस्त हूँ या फिर स्वार्थी या दोनों जो तुम्हारी खबर नहीं लेता । पर यार तुम किस मिट्टी के बने हो जो मेरी आवाज पर दौड़ पड़ते हो । मुझसे जुड़ा हर दिन , समय और जगह तुम्हे आज भी बखूबी याद है और मैं फेसबुक के भरोसे रहता
13 जुलाई 2016
19 जुलाई 2016
आज का सुवचन
19 जुलाई 2016
02 जुलाई 2016
आज का सुवचन 
02 जुलाई 2016
14 जुलाई 2016
आज का सुवचन  
14 जुलाई 2016
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