शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
27 जून 2016
    ॐ भूर्भुवः सुवः। ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमिहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ।।2।।    जो प्रणव रूप में सच्चिदानन्द परमात्मा भूः, भुवः, स्वः रूप त्रिलोक में संव्याप्त है। समस्त सृष्टि के उत्पादन करने  वाले उन  सवितादेव  के सर्वोत्तम  तेज का  हम ध्यान करते हैं, जो(वे सविता देवता)हमारी बुद्धियों
27 जून 2016
13 जुलाई 2016
आज फ्रेंडशिप डे नहीं पर ना जाने क्यों तुम्हे याद करने का बड़ा मन हो रहा । शायद मैं एक बुरा दोस्त हूँ या फिर स्वार्थी या दोनों जो तुम्हारी खबर नहीं लेता । पर यार तुम किस मिट्टी के बने हो जो मेरी आवाज पर दौड़ पड़ते हो । मुझसे जुड़ा हर दिन , समय और जगह तुम्हे आज भी बखूबी याद है और मैं फेसबुक के भरोसे रहता
13 जुलाई 2016
26 जून 2016
    आत्महत्या करना कायरता है अब चाहे किसी भी तनाव में हो पर जीवन की जंग तो हार ही गए। इस प्रकार का कायरता पूर्ण कार्य किसी को भी नहीं करना चाहिए। संघर्ष के बाद सफलता है और  रात के बाद दिन है। यह प्रकृति का नियम है जिससे  सृष्टि चल रही है। सुख और दुःख तो आते  जाते रहते हैं।  माता-पिता चाहें तो  अपने 
26 जून 2016
27 जून 2016
    आज का सुवचन 
27 जून 2016
26 जून 2016
     ध्‍ार्म शब्‍द धृत धातु से बना है जिससे तात्‍पर्य है कि धारण करना। नित्‍य अच्‍छा स्‍वाध्‍याय करेंगे यह संकल्‍प लेकर उस नियम का पालन करेंगे तो यह भी धार्मिक होना है। दूजों की सहायता का संकल्‍प लेकर धारण कर लेंगे अौर उस पर चल पड़ेंगे तो यह सहायता करने का धर्म भी आपका हो जाएगा। इस प्रकार आप कितने भ
26 जून 2016
14 जुलाई 2016
आज का सुवचन  
14 जुलाई 2016
19 जुलाई 2016
आज का सुवचन
19 जुलाई 2016
26 जून 2016
     मन की गति बहुत तेज है। पलक झपकते इधर-उधर घूम आता है। कभी इधर जाता है तो कभी किधर जाता है। मन की गति पर लगाम लगाना ही मन को एकाग्र करना है। जो लगाम लगा लेते हैं वे ही कुछ हटकर करते हैं, बाकी सब तो लकीर के फकीर हैं उनका काम रोज की दिनचर्या पूरा करके सो जाना है और अगले दिन नित्य कर्म से निपटकर पुन
26 जून 2016
26 जून 2016
आज का सुवचन 
26 जून 2016
28 जून 2016
सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च। सूर्याद्वै खल्विमानि भूतानि जायन्ते। सूर्याद्यज्ञः  पर्जन्योऽन्नमात्मा।।3।।  सूर्यदेव समस्त जड़ और चेतन जगत् की आत्मा हैं। सूर्य से सभी प्राणियों की उत्पत्ति होती है। सूर्य से ही यज्ञ, पर्जन्य, अन्न एवं आत्मा(चेतना) का  प्रादुर्भाव  होता  है।  नमस्त आदित्य। त्वमेव प्रत्यक
28 जून 2016
14 जुलाई 2016
आज का सुवचन  
14 जुलाई 2016
29 जून 2016
     आपको निज ज्ञान की नींव को मजबूत बनाना चाहिए। सामान्यतः ज्ञान स्वाध्याय अर्थात्‌ अध्ययन से बढ़ता है। प्रत्येक व्यक्ति को स्कूल व कॉलेज में पढ़ते हुए अपने ज्ञान को पूर्ण समर्पण भावना से अर्जित करना चाहिए। जो ज्ञान बढ़ाने में सक्रिय रहते हैं वे कठोर परिश्रम एवं सतत प्रयास से शेष सबकुछ पा लेते हैं।
29 जून 2016
25 जून 2016
आज का सुवचन 
25 जून 2016
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