मानवाधिकार महिलाओं के नाम एक खुला खत

11 जुलाई 2016   |  मनोज सिंह   (172 बार पढ़ा जा चुका है)

सेक्युलर भद्र महिलायें , मानवाधिकार का झंडा बुलंद करने वाली वीरांगनाएं , फ्री सेक्स समर्थक और मेरा शरीर-मेरा जीवन की तमाम ब्रांड एम्बेसडर ,

सादर प्रणाम ,

आपकी तमाम स्वतंत्र विचारधारा और जीवन शैली से कभी कोई आपत्ति नहीं रही और किसी को होनी भी नहीं चाहिए ! 

आप किसी आतंकवादी के समर्थन में आसूं भी बहा सकती हैं , आपके आसूँ हैं जहां मर्जी इसका उपयोग करने का हक़ है आपको !

सिर्फ इतना जानने की इच्छा है की इन आतंकवादी और शांतिदूतों (?) की, महिलाओं को लेकर जो सोच है, उसपर आपकी क्या राय है ?
अगर कोई राय नहीं है तो पहले राय कायम कीजिये , और विनम्र अनुरोध है की इसके लिए पहले इनके बीच रहकर अनुभव लीजिए , फिर लोगों में ज्ञान बाँटिये !
स्वतंत्र नारीवाद का एक अंध समर्थक !

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