सभी दोस्तों के लिए एक चिट्ठी

13 जुलाई 2016   |  अभिजीत साहू   (257 बार पढ़ा जा चुका है)

आज फ्रेंडशिप डे नहीं पर ना जाने क्यों तुम्हे याद करने का बड़ा मन हो रहा । शायद मैं एक बुरा दोस्त हूँ या फिर स्वार्थी या दोनों जो तुम्हारी खबर नहीं लेता । पर यार तुम किस मिट्टी के बने हो जो मेरी आवाज पर दौड़ पड़ते हो । 
मुझसे जुड़ा हर दिन , समय और जगह तुम्हे आज भी बखूबी याद है और मैं फेसबुक के भरोसे रहता हूँ । देर हो जाने पर बहाने बनाने लगता हूँ । जानता हूँ तुम सब समझ जाते हो पर कभी फील नहीं होने देते । यही तुम्हारी खासियत और बड़प्पन है जो मुझे तुमसे अलग करता है । सच कहूँ तो मैं दूसरा जन्म ले कर भी तुम सा नहीं बन पाऊंगा । मेरे लिए तुम्हारी सख्सियत राम सरीखे है जो अपनी पीड़ा को भूल मित्र की सहायता पहले करता है । मेरे जीवन में तुम्हारी भूमिका जामवन्त की रही है और मैं जानता हूँ कि तुम कर्ण की तरह हमेशा मेरे साथ ही रहोगे । चाहे दुनिया इधर की उधर क्यों न हो जाये । 
यार यकीन करो ये सारी बाते सिर्फ बहलाने भर को नहीं कह रहा । आज सचमुच तुम्हारे गले लगने का जी कर रहा । गले लग बताना चाहता हूँ की रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते और दोस्त सिर्फ नाम मात्र के लिए नहीं बनाये जाते । तुमसे जाने अनजाने बहुत कुछ सीखा है और इतना कुछ पाया है जिसकी मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था । 
यार तुम मेरा साथ यूँ ही देते रहना क्योकि मैं जानता हूँ कि तुम्हारे बिना मैं कुछ भी नहीं ।



© अभिजीत

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