मथुरा के बाद कश्मीर की वादियों में तनाव की आग

13 जुलाई 2016   |  गुरुदीप त्रिपाठी   (127 बार पढ़ा जा चुका है)

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हिमालय की गोद में बसा जम्मू और कश्मीर अपनी नेचुरल ब्यूटी के लिए दुनिया भर में अपना एक ख़ास मुकाम रखता है। चारों ओर बिछी हुई बर्फ की सफेद चादर, देवदार तथा चीड़ के पेड़ों से गिरते बर्फ के टुकड़े सच में यहाँ आने वालों को नई दुनिया का आभास देते हैं। जिधर नजर दौड़ाएं, बस बर्फ ही बर्फ दिखती है और उस पर दिखते हैं यह है सर्दियों में जम्मू-कश्मीर के उन पर्यटनस्थलों का नजारा जिन्हें शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता और एक बानगी देखने पर हर शख्स कह उठता है 'अगर धरती पर कहीं स्वर्ग है तो यहीं है, यहीं है, यहीं है...।'

पर, कश्मीर मथुरा की तरह पिछले छह दिनों से सुलग रहा है। जम्मू कश्मीर में हिजबुल मुजाहीदीन के कथित कमांडर बुरहान वानी की शुक्रवार को मुठभेड़ में मौत हो गई। इसके बाद वहां की वादियों में अचानक हिंसक विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया। इसमें मरने वालों की संख्या अब तक 31 पार कर गई है। वहीं 1500 से ज्यादा लोग घायल हैं। इनमें पुलिस के जवान भी शामिल हैं। इसके अलावा अनंतनाग में एक पुलिसकर्मी शहीद भी हो गया है। बडगाम में सीआरपीएफ के ट्रेनिंग और स्टोरेज फैसिलिटी को लूटने की कोशिश की गई। सोमवार को जम्मू से अमरनाथ यात्रियों का जत्था किश्तों में रवाना किया गया। जत्था रात में बनिहाल में रुकेगा। इसके बाद कड़ी सुरक्षा के साथ बनिहाल से बालटल रवाना होगा।  


इंडियन गो बैक... इंकलाब आएगा

अनंतनाग और बारावूल में दीवारों पर जगह-जगह भारत विरोधी नारे लिखे गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने दीवारों पर इंडियन गो बैक..., इंकलाब आएगा..., वी वान्ट फ्रीडम...। यह भारत विरोधी नारे दीवारों पर हरे रंग से लिखे गए हैं। तनाव की आग से झुलसे रहे कश्मीर में सबसे ज्यादा दक्षिणी कश्मीर के चार जिले प्रभावित हैं। इनमें अनंतनाग, बरामूल, फोटर और श्रीनगर शामिल हैं।


फूंक दिया थाना, जली पड़ीं हैं गाड़ियां

हिंसक विरोध-प्रदर्शनों ने अभी थमने का नाम नहीं लिया है। सोमवार रात में अचानक श्रीनगर के एक पुलिस थाना पर प्रदर्शनकारियों ने हमला बोल दिया। उन लोगों ने थाने को आग के हवाले कर दिया। इससे पलभर में थाना का नाम वहां से मिट गया। पुलिस की गाड़ियां जला दी गईं। सड़कों के किनारे क्षतिग्रस्त गाड़ियों की कतार लगी हुई है।


पुलिस से ज्यादा सेना पर भरोसा

अमरनाथ यात्रा करने वाले करीब 10 हजार यात्री अभी भी सरकारी कैम्प और प्राइवेट गेस्ट हाउसों में फंसे हैं। चंदनबाड़ी और बालटाल से कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार आधी रात के बाद तीन हजार यात्री सेना ने किसी तरह जम्मू भेजा। तनाव की इस आग में फंसे यात्रियों का कहना है कि उन्हें पुलिस से ज्यादा सेना के जवानों पर भरोसा है।


फफक पड़े पर्यटक, बोले हमें घर जाना है

अनंतनाम में हुए पथराव में घायल अमरनाथ यात्री विनोद तापरे से जब बात की गई तो वह फफक पड़े। तापरे ने रोते हुए बताया कि वह अपने तीन साथियों से बिछड़ गए हैं। जम्मू कश्मीर में मोबाइल नहीं चलते हैं। इसलिए किसी से संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा किसी तरह घर पहुंच जाएं बस। नागपुर से श्रीनगर घूमने आए नवविवाहत जितेंदर साढ़ी और रविदंर कोर पांच दिन से पहलगाम में फंसे हैं। पूना के सुब्रतो सरकार भी अपनी पत्नी के साथ पहलगाम में फंसे हैं। आंखों देख हालत को बताते हुए उनकी रूह तक कांप जा रही है। उनका कहना है कि वह अपने घर पहुंच जाएं बस। उन्हें अब कहीं नहीं जाना है।


कैसे जाएं, नहीं हैं एक भी रुपये

मुंबई के विश्वजीत दामले, गाजियाबाद के रमन कुमार जैसे सैकड़ों लोग अभी भी प्राइवेट होटलों में फंसे हैं। उनके पास खाने के लिए एक भी रुपये नहीं हैं। बताया कि घर से रुपये मंगवाया गया है। बस, किसी तरह घर पहुंच जाएं। 


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