शब्‍द सामर्थ्‍य बढ़ाईए - 12

14 जुलाई 2016   |  डाॅ कंचन पुरी   (157 बार पढ़ा जा चुका है)

शब्‍द सामर्थ्‍य बढ़ाईए - 12

1. तीय   

क-गीला 

ख-तीखा 

ग-औरत  

2. तुंगिमा 

क-मुख 

ख-ऊंचाई 

ग-नाभि 

3. तुमुल 

क-कोलाहल, हलचल 

ख-हल्का  

ग-दुर्बल  

4. तुर्त-फुर्त      

क-घुड़सवार 

ख-घोड़ी 

 ग-झटपट, तुरन्त 


उत्तर

1. ग   2. ख 3. क 4. ग


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प्रेरक और ज्ञानवर्धक प्रयास के लिए धन्यवाद.

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हर समस्या का समाधान होता है , कहना आसान है मगर असल में कर पाना हर बार उतना भी सरल नहीं होता ! खासकर तब जब वो भीड़ का उन्माद हो या फिर कट्टर धार्मिकता से पैदा किया गया जूनून ! समाधान असम्भव तब हो जाता है जब समस्या जबरन पैदा की गयी हो ! कहा भी जाता है की पागलपन का कोई इलाज नहीं !लेकिन इस चक्कर में किसी
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व्यक्तित्व का निर्माण मूल रूप से विचारों पर निर्भर है। चिन्तन मन के साथ-साथ शरीर को भी प्रभावित करता है। चिन्तन की उत्कृष्टता को व्यवहार में लाने से ही भावात्मक व सामाजिक सामंजस्य बनता है। हमारे मन की बनावट ऐसी है कि वह चिन्तन के लिए आधार खोजता है। चिन्तन का जैसा माध्यम होगा वैसा ही उसका स्तर होगा।न
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बस दलपतपुर आकर रुक गई। सवारियों का आवागमन चरम सीमा पर था। बस ठसाठस भरी थी। लेकिन फिर भी कंडक्टर का आवाज दे-देकर यात्रियों को बुलाना वातावरण में कोलाहल पैदा कर रहा था।  एक बूढ़ी औरत के बस के पायदान पर पैर रखते ही कंडक्टर ने सीटी दे दी। कंपकंपाते हाथों से बुढि़या की पोटली सड़क पर ही गिर पड़ी। ‘रुकके भ
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