शब्‍द सामर्थ्‍य बढ़ाईए - 14

17 जुलाई 2016   |  डाॅ कंचन पुरी   (160 बार पढ़ा जा चुका है)

शब्‍द सामर्थ्‍य बढ़ाईए - 14

1. झाबर     

क-तालाब   

ख-पोखर   

ग-दलदल    

2. झिल्लड़  

क-पापड़ 

ख-झीना 

ग-झिल्ली   

3. झीमर 

क-मल्लाह 

ख-कीड़ा    

ग-झूमना   

4. झुटुंग        

क-मल्लाह  

ख-भ्रम   

 ग-जटाधारी   


उत्तर

1. ग   2. ख 3. क 4. ग


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1. तिय     क-छाया  ख-अंधकार  ग-स्त्री    2. तिरिया क-पार होना ख-औरत ग-पत्ते  3. तिरोधान क-अंतर्धान ख-आड़   ग-अपमान   4. तीमार       क-अंधेरा  ख-परछाईं   ग-सेवा  उत्तर 1. ग   2. ख 3. क 4. ग
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गुरु शब्द में दो व्यंजन (अक्षर) गु और रु के अर्थ इस प्रकार से हैं- गु शब्द का अर्थ है अज्ञान, जो कि अधिकांश मनुष्यों में होता है ।रु शब्द का अर्थ है, जो अज्ञान का नाश करता है ।अतः गुरु वह है जो मानव जाति के आध्यात्मिक अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाते हैं और उसे आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं । गुरु से
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व्यक्तित्व का निर्माण मूल रूप से विचारों पर निर्भर है। चिन्तन मन के साथ-साथ शरीर को भी प्रभावित करता है। चिन्तन की उत्कृष्टता को व्यवहार में लाने से ही भावात्मक व सामाजिक सामंजस्य बनता है। हमारे मन की बनावट ऐसी है कि वह चिन्तन के लिए आधार खोजता है। चिन्तन का जैसा माध्यम होगा वैसा ही उसका स्तर होगा।न
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1. चांपना        क-चतुर       ख-ठगना       ग-दबाना         2. चाम    क-चमकना     ख-खाल     ग-चेहरा       3. चासना     क-जोतना     ख-खेतिहर        ग-हलवाहा        4. चिंदी           क-बिंदी      ख-छोटा टुकड़ा        ग
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हर समस्या का समाधान होता है , कहना आसान है मगर असल में कर पाना हर बार उतना भी सरल नहीं होता ! खासकर तब जब वो भीड़ का उन्माद हो या फिर कट्टर धार्मिकता से पैदा किया गया जूनून ! समाधान असम्भव तब हो जाता है जब समस्या जबरन पैदा की गयी हो ! कहा भी जाता है की पागलपन का कोई इलाज नहीं !लेकिन इस चक्कर में किसी
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बस दलपतपुर आकर रुक गई। सवारियों का आवागमन चरम सीमा पर था। बस ठसाठस भरी थी। लेकिन फिर भी कंडक्टर का आवाज दे-देकर यात्रियों को बुलाना वातावरण में कोलाहल पैदा कर रहा था।  एक बूढ़ी औरत के बस के पायदान पर पैर रखते ही कंडक्टर ने सीटी दे दी। कंपकंपाते हाथों से बुढि़या की पोटली सड़क पर ही गिर पड़ी। ‘रुकके भ
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नमस्कार दोस्तों, मुंबई मेरे लिए किसी चाय की ग्लास की भांति है | एक मिश्रित संस्कृति एक मिश्रित जीवनशैली | यह मेरा सौभाग्य ही है कि मेरा जन्म इस नगरी में हुआ जिसे सपनो का शहर कहते है | लेखन का कौशल या लेखन मे रूची तो सदैव से ही थी पर इसे कभी जीवनयापन  का साधन भी बनाऊंगा यह सोचा नहीं था | वैसे भी हमने
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उपयोगी को ग्राह्य कर लेना चाहिए और अनुपयोगी को त्याज्य देना चाहिए। एक बार की बात है कि गांधी जी को किसी युवक द्वारा लिखा एक पत्र मिला जिसमें गांधी जी को बहुत गालियां दी गई थीं।  गांधी जी ने शान्त भाव से तीन पन्नों का पत्र पढ़ा था और उसमें लगी आॅलपिन को निकालकर रख लिया और पत्र फाड़कर रद्दी की टोकरी म
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हम निज विचारों से ही निज व्यक्तित्व निर्मित करते हैं। यदि हम अपने विचारों को सृजनात्मक व स्फूर्तिमय बना लें तो इससे हम अपना ही निर्माण करेंगे।हमारी इच्छाएं, आवश्यकताएं, भावनाएं और आर्दश हमारे विचार ही तो हैं।विचारों के संयम से ही व्यक्त्वि का संयम होता है। हमारे विचारों की समृद्धि व प्रखरता ही हमारे
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अवसर का सदुपयोग ही भाग्य है।भाग्य का सदुपयोग सफलता है। जीवन को सफल वही बना पाता है जो प्राप्त अवसरों का उपयोग करने हेतु पूर्ण तत्परता सहित प्रस्तुत रहता है। प्रायः अवसर सभी के समक्ष आते हैं पर हम उन अवसरों को पकड़कर उपयोग में लाने के लिए सजग नहीं होते हैं। सच्चाई से कार्य करने वाले, पूर्ण समर्पण भाव
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1. तीय    क-गीला ख-तीखा ग-औरत   2. तुंगिमा क-मुख ख-ऊंचाई ग-नाभि 3. तुमुल क-कोलाहल, हलचल ख-हल्का  ग-दुर्बल  4. तुर्त-फुर्त      क-घुड़सवार ख-घोड़ी  ग-झटपट, तुरन्त उत्तर 1. ग   2. ख 3. क 4. ग
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1. चलावा      क-विचलित     ख-छलना     ग-रीति       2. चला  क-चलना   ख-बिजली   ग-अस्थिर     3. चवाई   क-निंदक   ख-चपल      ग-चाल      4. चांइयां         क-चहक    ख-चहकना      ग-धूर्त     उत्तर 1. ग   2. ख 3. क 4. ग
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20 जुलाई 2016
निरंतरता सीखनी चाहिए। जब तक आप कोई संकल्प लेकर उसमें निरंतरता नहीं रखेंगे उसका अच्छा प्रभाव भी नहीं मिलेगा और संकल्प भी अधूरा रह जाएगा। मान लो आपन संकल्प लिया कि कल से मैं प्रतिदिन आधा घंटा व्यायाम करूंगा। आपने अपने संकल्प के अनुसार प्रारम्भ भी कर दिया पर किसी न किसी कारणवश आप नागा करने लगे। ऐसा करन
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1. टांट       क-टलना    ख-टाट    ग-खोपड़ी      2. ठकुरसुहाती क-ठाकुरों का समूह  ख-चापलूसी  ग-रीता    3. ठसक   क-अभिमान  ख-निठल्ला     ग-ठिकाना     4. ठाकना         क-नखरा   ख-अंदाज     ग-मना करना    उत्तर 1. ग   2. ख 3. क 4. ग
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हम निज विचारों से ही निज व्यक्तित्व निर्मित करते हैं। यदि हम अपने विचारों को सृजनात्मक व स्फूर्तिमय बना लें तो इससे हम अपना ही निर्माण करेंगे।हमारी इच्छाएं, आवश्यकताएं, भावनाएं और आर्दश हमारे विचार ही तो हैं।विचारों के संयम से ही व्यक्त्वि का संयम होता है। हमारे विचारों की समृद्धि व प्रखरता ही हमारे
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अनेक लोग अपना कार्य बीच में ही छोड़कर बैठ जाते हैं जबकि उन्हें सफलता मिलने वाली होती है। मन में करो या मरो की भावना जाग्रत रखने की भावना इनमें होती तो वे सफलता के शीर्ष पर होते। जो सफलता मिलने के पूर्व ही कार्य छोड़ देते हैं वे कभी आगे नहीं बढ़ सकते हैं। ऐसा उन्हीं के साथ होता है जिनके मन में स्वार्
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1. जांगलू         क-पशु        ख-जंगल        ग-जंगली          2. जांगुल     क-जंगली      ख-विष      ग-तेज        3. जाता     क-कन्या      ख-शिशु         ग-बच्चा         4. जित्वर            
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