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बारिश

21 जुलाई 2016   |  सुनील कुलकर्णी

बारिश

बहुतो ने गवयी  अपनी जान को

आपकी राह देखते

आजा अबतो बरस



आपके न आने से

धरती ओर जिंदगी

बंजर सी हो गई  है


आजा अबतो बरस



आपकी  बेरुखी ने

कितनो की उल्झन बढाई

अपनो से बिछडके

कितनो ने मिटा दिया अपने आपको


आजा अबतो बरस



 जबतक  देखेंगे न

लहरते खेत को धरती पर

न सुकून मिलेगा उनको जन्नत मे भी


आजा अबतो बरस


बहुतो का उजडा है चमन

अबके  तेरे बरसने से

किसी  का तो बचेगा


सुनील


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