आरएसएस

22 जुलाई 2016   |  मनोज सिंह   (97 बार पढ़ा जा चुका है)

आरएसएस की तुलना आईएसआईएस से करने वाले इतिहासकार अब कह रहे हैं की, पब्लिक परसेप्शन पर गांधी का हत्यारा आरएसएस को कहा जाता रहा है।
तो इनसे पूछा जाना चाहिए की तुम लोगों के लिखने से परसेप्शन बनता है या तुम लोग सिर्फ परसेप्शन के हिसाब से लिखते हो ?
ओफ़्फ़,इन्ही लोगों ने इतिहास को भी परसेप्शन बना डाला !

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