आरएसएस का भारत मॉडल

31 जुलाई 2016   |  मनोज सिंह   (142 बार पढ़ा जा चुका है)

सुबह सुबह एक अखबार में रामचंद्र गुहा का लेख पढ़ रहा था 'आरएसएस का भारत मॉडल' ! दो बार पढ़ा मगर समझ नहीं आया की वो क्या कहना चाहते हैं ! यूँ तो हर अखबार के तकरीबन सभी लेखों का यही हाल रहता है इसलिए आजकल अखबार की कतरन काट कर रखने की जगह वो रद्दी में फेंकने के काम अधिक आता है ! लेकिन उनके नाम के नीचे लिखा था 'जाने माने इतिहासकार और लेखक', जिस पर आपत्ति है ! अब उन्हें जानते तो हैं क्योंकि मीडिया ने छाप छाप कर हमें जानने के लिए मजबूर कर दिया मगर मानने वाली बात सरासर गलत है ! ये जितने भ्रमित और औसत दर्ज के लेखक हैं अपने लिखे इतिहास को भी उन्होंने अपनी तरह ही बना दिया है ! जबकि भारत का इतिहास स्वर्णिम था वर्ना दुनिया के तमाम लोग यहाँ यूँ ही नहीं आते !यह भारत की महान सनातन संस्कृति के समर्थन में कही गयी मेरी एक लाइन मात्र है वर्ना लिखना शुरू करूं तो कई ग्रन्थ लिखे जा सकते हैं ! 
बहरहाल उन्हें औसत और भ्रमित कहने के पीछे कारण हैं ! अब पूरे लेख में गाय और हिन्दू शब्द बार बार आया है, और आया है राष्ट्रवाद ! साथ में स्वाद देने के लिए मोदी हैं अब जब मोदी होंगे तो गुजरात होगा और गुजरात होगा तो २००२ होगा ! बस तैयार हो गया इनका लेख !आजकल सेक्युलर बुद्धिजीवी बनने के इन सब का विरोध बेसिक योग्यता है ! लेकिन इन महोदय से एक बात पूछनी चाहिए की ये कितनी बार आरएसएस की किसी शाखा और गोष्ठी में गए हैं ? क्या वहाँ सिर्फ गाय और मोदी की चर्चा होती है ? हास्यस्पद है ! जितनी बार ये अवार्ड वापसी गैंग गाय का नाम लेता है उतनी बार तो कोई हिन्दू भी नहीं लेता होगा ! गौ माता हिन्दुओं की आस्था है मगर ऐसी आस्था अनेक चीजों में हैं पीपल में तुलसी में बरगद में !हम लोग तो साँप को भी दूध पिलाते हैं और बंदर को केला ! सच कहे तो प्रकृति के अनगिनत जीव जंतुओं पौधों की हम पूजा करते हैं ! और इनके पीछे एक चिंतन है हजारों वर्ष की संस्कृति का अनुभव, जिसे अब वैज्ञनिक दृष्टिकोण से स्वीकृति भी मिली है ! विज्ञान तो अब आया मगर जीवन का प्राकृतिक ज्ञान हमारे पूर्वजों के पास सदियों से था !आप आरएसएस का विरोध कीजिये और उनके राष्ट्रवाद का भी , मगर उनका पहले सही अध्ययन तो कीजिये !आप को सिर्फ गाय काटने का विरोध दिखायी देता है मगर हमें तो चीटीं मारने के लिए भी मना किया जाता है ! आप इस गौवध के कारण हो रही इक्का दुक्का घटनाओं से इतने सक्रीय हो जाते हैं की यह भूल जाते हैं की १२५ करोड़ की आबादी में साठ साल की आजादी के बाद भी घर से लेकर सड़क पर हर पल हरेक आदमी ना जाने अनेक छोटी छोटी जरूरतों के लिए लड़ रहा है ! इस कोलाहल को पैदा करके आप उन घटनाओं से बच जाते हैं जहां लोग लोगों को इसलिए मार रहे हैं क्योंकि वो उनके धर्म को नहीं मानते ! आपके लिए गौ हत्या का विरोध करने वाला अधिक गुनहगार है मगर आदमी को मारने वाला आतंकवादी नहीं ! हद है !
अंत में , ये तो बताते चलिये की आप का राष्ट्रवाद क्या कहता है ? आप के भारत का मॉडल क्या है ? हम जानते हैं की आप एक परिवार विशेष की सत्ता चाहते हैं जिसके दरबार में आप सुशोभित हो कर जाने माने लेखक और इतिहासकार बने रहे ! इस पर एक सलाह जरूर दे सकते हैं की अगर आप को हिन्दू शब्द से इतनी ही नफरत है तो उतार दीजिये ये चोला और मुक्त हो जाइये राम और चन्द्र नाम से ! धर्म परिवर्तन तो हमारे यहाँ वैसे भी एक सफल उद्योग है और दूसरे धर्मों में पैसे और शोहरत भी अधिक मिलती है ! वहाँ आपकी पदोन्नति होगी और आप महान लेखक और इतिहासकार कहलाये जाएंगे !

अगला लेख: कही तुर्की एक और कट्टर धार्मिक राष्ट्र बनने की राह पर तो नहीं जा रहा ?



मनोज सिंह
02 अगस्त 2016

धन्यवाद , विचारों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए !

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