उत्तर प्रदेश – दूध के उत्पाद में नं. 1

04 अगस्त 2016   |  प्रदीप सिंह   (674 बार पढ़ा जा चुका है)

उत्तर प्रदेश भारत की ‘दूध बेल्ट’ कहलाती है| उत्तर प्रदेश वही भूमि है जहां वृन्दावन में श्री कृष्ण ने गैया चराई थी और गोपियों के संग खेल | उस दिव्य स्पर्श का रस हम भारतवासियों ने शताब्दियों तक पाया और दूध का उत्पादन उत्तर प्रदेश में बढ़ता ही चला गया। आइए अब मैं आपको बताती हूं उत्तर प्रदेश के दुग्ध उत्पादन के बारे में कुछ रोचक तथ्य।


उत्तर प्रदेश – भारत का प्राथमिक दुग्ध उत्पादक


भारत का दुग्ध उत्पाद पिछले साल में कई गुना बढ़ गया है| देश के अन्य राज्यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश में दूध का उत्पादन सबसे ज़्यादा है। यहाँ साल भर में 200 लाख टन से भी ज़्यादा दूध का उत्पादन किया जाता है। यही वजह है कि उत्तर-प्रदेश भारत में सबसे अधिक दुग्ध उत्पादन करने वाला राज्य है| उत्तर प्रदेश भारत के कुल दुग्ध उत्पाद में 17% का योगदान करता है| 2010-11 में इस राज्य ने प्रतिदिन 21033.3 हज़ार किलो दूध का उत्पादन किया|



Milk production




उत्तर प्रदेश सरकार की कामधेनु योजना


उत्तर प्रदेश राज्य ने 2013-14 में 240 लाख मि. टन से भी अधिक मात्रा में दुग्ध उत्पादन किया जो कि देश में सर्वोच्च था| परन्तु राज्य दुग्ध उत्पादन को और भी बढाने के लिये राज्य सरकार ने ‘कामधेनु योजना’ की शुरुआत की है|


‘कामधेनु योजना’ के पहले चरण में 75 कामधेनु डेरी यूनिट और 150 ‘मिनी’ कामधेनु डेरी यूनिट खोलने का फैसला किया गया| दूसरे चरण में इन 75 कामधेनु डेरी यूनिट की संख्या को बढ़ाकर 425 और 150 ‘मिनी’ कामधेनु डेरी यूनिट को 2500 तक बढ़ाने का फैसला किया गया। 


प्रत्येक कामधेनु डेरी यूनिट में 100 पशु (गाय अथवा भैंस) रखने का फैसला किया गया। गाय केवल क्रोस ब्रीड जर्सी, क्रोस ब्रीड एच.ऍफ़. अथवा शाहिवल ब्रीड तथा भैंस मुर्रह ब्रीड की हो सकती है|


पालक/किसान ये निर्णय ले सकते हैं कि उनकी यूनिट गाय की होगी या भैंस की या फिर मिक्स्ड| किसानों और पालकों को अपनी यूनिट तैयार करने में आने वाले खर्च का 75% बैंक लोन के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। इस लोन के पांच साल तक के ब्याज को चुकाने में सरकार किसानों की मदद करेगी|


उत्तर प्रदेश की दुग्ध संस्थाए


बीसवीं शताब्दी की शुरुआत से ही उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे दूध के उत्पादन के पीछे राज्य की को- ऑपरेटिव दुग्ध संस्थाओं का हाथ है। उत्तर प्रदेश की पहली मिल्क को-ऑपरेटिव थी 1918 में शुरू की गयी इलाहाबाद के एक छोटे से गाँव की एक मिल्क को-ऑपरेटिव सोसाइटी। इसके बाद 1938 में कई सफल कोशिशों ने रास्ता बनाया लखनऊ मिल्क यूनियन की स्थापना के लिये| इससे उत्तर प्रदेश को भारत में पहली बार ऐसी संस्थाओं के निर्माण की पहल करने का गौरव प्राप्त हुआ| पी.डी.सी.एफ़. ने उत्तर प्रदेश में वर्ल्ड बैंक द्वारा आयोजित ‘ऑपरेशन फ्लड’ को इंप्लिमेंट किया| वर्तमान में पी.डी.सी.एफ. राज्य के 59 जिला दुग्ध संस्थाओ एवं 13500 ग्राम डेयरी संस्थाओ के 6 लाख ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को सहयोग पंहुचा रही है|



‘पराग मिल्क-अप’ एक और ऐसी ही योजना है| यह एक दुग्ध संस्था है| ‘पराग’ के नाम से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की एक बड़ी श्रृंखला बाज़ार में उपलब्ध है| इनमें से कुछ है – दूध, स्किम्ड मिल्क पाउडर, होल मिल्क पाउडर, मक्खन, घी, और इसके साथ ही स्वदेशीय दूध उत्पादों की एक बड़ी श्रृंखला जिनमे है – पनीर, दही, पेढा, मिल्क केक, खोया, लड्डू, मट्ठा और छाछ इत्यादि| मेरठ और वाराणसी में लगे कारखाने लगातार राज्य के किसानो के दुधारू पशुओ को संतुलित आहार मुहैया कराने के लिये कार्यरत है| कानपुर, लखनऊ, मेरठ, वाराणसी, आगरा और राए बरेली में चल रहे ट्रेनिंग सेंटर्स किसानो को योग्यता एवं जानकारी सम्बन्धी सूचना उपलब्ध कराते रहते है| राय बरेली में जर्सी (यूरोपियन) पशुओ के प्रजनन को बढाने के लिये एक ख़ास यूनिट बनाई गयी है| जर्सी गायें ज्यादा दूध देती है|


इसी कारण सरकार के वर्तमान और निकट भविष्य में दूध उत्पाद बढाने की योजनाओं में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है देश की अधिकतम गायो का जर्सी बैलो के द्वारा वीर्यरोपन कराना| जिससे ज्यादा से ज्यादा क्रॉस ब्रीड गायें हमारे किसान भाइयों के पास हो और वो ज्यादा से ज्यादा दूध दें|

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