"ग़ज़ल"

05 अगस्त 2016   |  महातम मिश्रा   (65 बार पढ़ा जा चुका है)

वज़्न - 212---212---212 
अर्कान - फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन 
बहर - बहरे-मुतदारिक मुसद्दस सालिम 
सांकेतिक गाना- आज जाने की ज़िद ना करो

प्यार पाने की रट ना करो
जीत जाने का जिद ना करो
देख लो हार दिल आपना
दिल लगाने की हद ना करो।।
ये विलाशक अजब चीज है 
पास आने का पद ना करो।।
हो गयी गर किसी को कभी
दूर जाने का नद ना करो।।
आजमा ले इसे बावला
छोड़ जाने का मद ना करो।।
दौलतें हैं यही जिंदगी की
लूट लेने की छद ना करो।।
गौतम चाह रखना मगर
राह खोने का कद ना करो।।

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: मत्तगयंद/मालती सवैया



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
27 जुलाई 2016
मत्तगयंद/मालती सवैया 211 211 211 211 211 211 211 22<!--[if !supportLineBreakNewLine]--><!--[endif]-->नाचत, गावत शोर मचावत, बाजत सावन में मुरली है भोर भयो चित चोरगयो भरि, चाहत मोहन ने हरली है॥  साध जिया मग का यहचातक, ढूंढ़त ढूरत घा करली है गौतम नेह बिना नहिभावत, काजल नैनन में भरली है॥ महातम मिश्र, गौत
27 जुलाई 2016
05 अगस्त 2016
गीत/नवगीत/तेवरी/गीतिका/गज़ल आदि आयोजन, के अंतर्गत आज- नवगीत विशेष आयोजन पर एक गजल/ गीतिका, मात्रा भार - 24, 12-12 पर यति...........देखों भी नजर उनकी, कहीं और लड़ी है सहरा सजाया जिसने, बहुत दूर खड़ी है गफलत की बात होती, तो मान भी लेते लग हाथ मेरी मेंहदी, कहीं और चढ़ी है॥ये रश्म ये रिवाजें, ये शोहरती बाज
05 अगस्त 2016
18 अगस्त 2016
गुरुवार- चित्र अभिव्यक्ति आप सभी मनीषियों को पावन रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई सह मंगल शुभकामना.......जय माता दी....... "कुंडलिया" बैठो मत उदास सखे, हर्षित राखी आज बहनों का आशीष है, थाली कंकू साज थाली कंकू साज, कलाई धर दे अपनी वादा कर शिरताज, झोलियाँ भर दे सपनी कह गौतम चितलाय, हिया में आकर पैठो नेकी क
18 अगस्त 2016
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x