हाइकू.........

05 अगस्त 2016   |  महातम मिश्रा   (70 बार पढ़ा जा चुका है)


हाइकू”

कहते हैं ये 

बरसाती तरु हैं

भरा है पानी॥-1

 

सूख न जाएँ 

उपवन झरने

पिलाते पानी॥-2

 

बैठना छांव

शीतल हवा है

तपता  पानी॥-3

 

संग चल तो

हरी भरी धरती

ओढ़ती पानी॥-4

  

गिरता पानी

सड़क ये वीरानी 

लुटाएँ पानी॥-5

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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चित्र अभिव्यक्ति आयोजन“कुंडलिया” सतरंज के विसात पर, मोहरे तो अनेकचलन लगी है चातुरी, निंदा नियत न नेक    निंदा नियत न नेक, वजीर घिर गया राजागफलत का है खेल , बजाए जनता बाजा गौतम घोड़ा साध, खेल में खेल न रंज राजा को दे मात, अढ़ैया पढ़ें सतरंज॥  महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी 
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“कुंडलिया”कल्पवृक्ष एक साधना, देवा ऋषि की राहपात पात से तप तपा, डाल डाल से छांह डाल डाल से छांह, मिली छाई हरियाली कहते वेद पुराण, अकल्पित नहि खुशियाली बैठो गौतम आय, सुनहरे पावन ये वृक्षमाया दें विसराय, अलौकिक शिवा कल्पवृक्ष॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी    
04 अगस्त 2016
05 अगस्त 2016
"
उगे दिनों में तारे धूप, रातों को दिखाए सपना इश्तहारीचौराहे पर, देख लटक चेहरा अपना इतनेनादां भी नहीं हम, छिछले राज न समझ पाएं गफलतमें भटके हुए हैं, उतार ले मोहरा अपना।।चिढ़ रही हैं लचरती सड़क, मौन बेहयाई देखकर उछलतेकीचड़ के छीटें, तक दामन दरवेश अपना।।कहीं ऐसा कुंहराम न तक, मचाएं फूदकती गलियां सलामतहाथों
05 अगस्त 2016
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