हाइकू.........

05 अगस्त 2016   |  महातम मिश्रा   (77 बार पढ़ा जा चुका है)


हाइकू”

कहते हैं ये 

बरसाती तरु हैं

भरा है पानी॥-1

 

सूख न जाएँ 

उपवन झरने

पिलाते पानी॥-2

 

बैठना छांव

शीतल हवा है

तपता  पानी॥-3

 

संग चल तो

हरी भरी धरती

ओढ़ती पानी॥-4

  

गिरता पानी

सड़क ये वीरानी 

लुटाएँ पानी॥-5

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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