कुछ दोहे..........

05 अगस्त 2016   |  महातम मिश्रा   (94 बार पढ़ा जा चुका है)

कुछ दोहे..........

छद्म रूप तेरा दिखा, कैसा रे इंसान
बस रौदा रौदी सड़क, खेतों में शैतान॥- 1

माँ बेटी के रूप को, जबह किया हैवान 
आती घिन है देखकर, धरती लहू लुहान॥- 2

गिरेगी कत मानवता, के होगी पहचान
न पायी लंका ऐसी, जब गए बीर हनुमान॥- 3

सेना कैसे पल रही, किसका कहाँ मकान
जरजमीन जोरू विकल, चहरों पर मुस्कान॥- 4

हर घर की बेटी बहन, भाई बाप जहान
पूछते आसमान से, तड़के साँझ विहान॥- 5

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

अगला लेख: मत्तगयंद/मालती सवैया



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
08 अगस्त 2016
"
सादर सुप्रभात मित्रों कल नेट समस्या के वजह से मन की बात न कह पाया, अत, पावन नागपंचमी की बधाई आज स्वीकारें......"नागपंचमी की याद"कल की बात है गाँव फोन किया तो पता चला आज दिन में नागपंचमी है और शाम को नेवान। मैंने कहाँ मना लेना भाई, साल का त्यौहार है। हम तो ठहरे परदेशी कहाँ नागपंचमी और कहाँ नेवान। बास
08 अगस्त 2016
11 अगस्त 2016
चित्र अभिव्यक्ति आयोजन“कुंडलिया” सतरंज के विसात पर, मोहरे तो अनेकचलन लगी है चातुरी, निंदा नियत न नेक    निंदा नियत न नेक, वजीर घिर गया राजागफलत का है खेल , बजाए जनता बाजा गौतम घोड़ा साध, खेल में खेल न रंज राजा को दे मात, अढ़ैया पढ़ें सतरंज॥  महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी 
11 अगस्त 2016
05 अगस्त 2016
देसज कजरी लोकगीत......  मोहन बाँके छैल बिहारी, सखियाकीन्ह लाचारी ना ले गयो चीर कदम की डारी, हम सखी रहीउघारी नामोहन हम तो शरम की मारी, रखि लो लाजहमारी ना....मोहन बाँके छैल बिहारी, सखियाकीन्ह लाचारी ना  अब ना कबहुँ उघर पग डारब, भूल भई जलभारी नामोहन हम तो विरह की मारी, रखि लो लाजहमारी ना.....मोहन बाँके
05 अगस्त 2016
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x