दोहा मुक्तक........

05 अगस्त 2016   |  महातम मिश्रा   (462 बार पढ़ा जा चुका है)

दोहा मुक्तक........

 

पाप पाप होता सदा, कोई भी हो बाप

डंश जाता है आबरू, दूजे के सह आप

दुष्कर्म ही नींव रखे, उपजे अनीति धाम

पीड़ा दे जाते दुसह, पाल न बिच्छू सांप॥

 

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी

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