हां मेरे भी दो चेहरे हैं

05 अगस्त 2016   |  विशाल शुक्ल   (124 बार पढ़ा जा चुका है)

हां मेरे भी दो चेहरे हैं

दुनिया से हंस हंस कर

बातें करना

बिना वजह खुद को

हाजिरजवाब दिखाना
पर असली चेहरे से
केवल तुम वाकिफ हो
है न...
क्योंकि तुम्हारे ही
आंचल में तो ढलके हैं
दुनिया के दिए आंसू
तुम्हारे ही कदमों में
झुका है 

गलती से लबरेज 

यह चेहरा
तुम पर ही तो
उतरा है 

जमाने भर का 

गुस्सा
और यह दुनिया
कहती है
मैं तुम्हारे ही सबसे करीब हूं
मेरा सबसे अच्छा चेहरा
तुम्हारे लिए है...


विशाल शुक्ल अक्खड़

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रेणु
01 मई 2017

बहुत मुश्किल है दो हिस्सों में जी पाना -- फिर भी जीना पड़ता है -- वेरी गुड -- ईमानदार स्वीकारोक्ति के लिए

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