पिरामिड..........

08 अगस्त 2016   |  महातम मिश्रा   (54 बार पढ़ा जा चुका है)

1-

ये

खेत

उगाते

हरियाली

करो न रंगाई

बीज खूं न भरो

उगी है बेहयाई॥

2-  

है

यही  

सड़क

जो जाती

तुम्हारे घर

निहारती खेत

देखते हुए नेत॥

 

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी     

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