पिरामिड..........

08 अगस्त 2016   |  महातम मिश्रा   (61 बार पढ़ा जा चुका है)

1-

ये

खेत

उगाते

हरियाली

करो न रंगाई

बीज खूं न भरो

उगी है बेहयाई॥

2-  

है

यही  

सड़क

जो जाती

तुम्हारे घर

निहारती खेत

देखते हुए नेत॥

 

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी     

अगला लेख: मत्तगयंद/मालती सवैया



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
27 जुलाई 2016
मत्तगयंद/मालती सवैया 211 211 211 211 211 211 211 22<!--[if !supportLineBreakNewLine]--><!--[endif]-->नाचत, गावत शोर मचावत, बाजत सावन में मुरली है भोर भयो चित चोरगयो भरि, चाहत मोहन ने हरली है॥  साध जिया मग का यहचातक, ढूंढ़त ढूरत घा करली है गौतम नेह बिना नहिभावत, काजल नैनन में भरली है॥ महातम मिश्र, गौत
27 जुलाई 2016
27 जुलाई 2016
“सेल्फ़ी, अच्छीया बुरी” अतिका भला न बोलना, अतिकी भली न चूप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥ यानिअति सर्वत्र वर्जयेत। जैसा कि अकसर देखा जाता है कि हर तसवीर के दो पहलू होते हैंऔर दोनों को गले लगाने वाले लोग भी प्रचूर मात्रा में मौजूद हैं। उन्हीं लोगों मेंसे अपना-अपना एक अलग ही रूप लेकर ईर और बीर,
27 जुलाई 2016
05 अगस्त 2016
गीत/नवगीत/तेवरी/गीतिका/गज़ल आदि आयोजन, के अंतर्गत आज- नवगीत विशेष आयोजन पर एक गजल/ गीतिका, मात्रा भार - 24, 12-12 पर यति...........देखों भी नजर उनकी, कहीं और लड़ी है सहरा सजाया जिसने, बहुत दूर खड़ी है गफलत की बात होती, तो मान भी लेते लग हाथ मेरी मेंहदी, कहीं और चढ़ी है॥ये रश्म ये रिवाजें, ये शोहरती बाज
05 अगस्त 2016
सम्बंधित
लोकप्रिय
05 अगस्त 2016
गी
27 जुलाई 2016
27 जुलाई 2016
"
05 अगस्त 2016
11 अगस्त 2016
05 अगस्त 2016
10 अगस्त 2016
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x