एक बाल श्रमिक की दास्तान

09 अगस्त 2016   |  जीतेन्द्र कुमार शर्मा   (124 बार पढ़ा जा चुका है)

एक बाल श्रमिक की दास्तान

मिस्टर आनन्द अपने परिवार के साथ लांग रूट पर लखनऊ से बनारस कार से जा रहे थे , तभी रास्ते में एक ढाबा मिला तो सोचा यही पर खाना खाया जाये। यह सोचकर उन्होने ढाबा के सामने अपनी कार रोक दी। कार के रूकते ही सामने से एक गन्दे से कपड़े पहने लड़का आया और बोला, बाबू जी आइयें। मिस्टर आनन्द अपने बच्चों और बीबी के साथ ढाबे के अन्दर आये । लडके ने मेज को कपडें से साफ कर बोला, बाबू जी क्या खाना है,यह कहते हुए उसने मीनू पकड़ा दिया। मिस्टर आनन्द ने मटर पनीर,दाल ,चावल और रोटियॅा लाने का आर्डर दिया। लड़का एक -एक कर सारा खाना मेज पर रख रहा था तभी दाल रखते समय हडबड़ा गया और  थोड़ी दाल मिसेज आनन्द की साड़ी पर  छिटक कर गिर गयी। मिस्टर आनन्द गुस्से सें आग बबूला हो कर अपशब्द बकते हुए कहा, हरामी के पिल्ले तूने इतनी महॅगी  साड़ी पर दाल गिरा दी। इतना सुनते ही ढाबे के मालिक ने आव देखा न ताव लड़के की पिटाई शुरू कर दी । इस पर मिस्टर आनन्द ने कहा कि बस अब पीटना बन्द करो। इससे मेरा नुकसान तो पूरा नही होगा। इस पर लडका बोला बाबू जी आप मुझे साथ ले जाइये मै आपके घर का पूरा काम करूगॅा। ढाबे का मालिक मुझसे काम तो पूरा करवाता है पर खाना बासी ही देता है और जब देखो तब गालियॅा देता है और मारपीट करता है । जब मेरी जिन्दगी में गाली खाना और पिटना ही लिखा है तो यह मेरी किस्मत है। काश मेरे बापू होते तो मुझंे यो ढाबे पर काम नही करना पड़ता। मै भी पढ़ने जाता और माॅ बाप के साथ खुशी से रहता। लड़के की दर्दभरी दास्तान सुनकर मिसेज आनन्द बोली, तुम हमारे साथ चलो, हम तुम्हे पढ़ायेगे लिखायेगें। लड़का अपने सारे दर्द और गम को भूलकर हॅंसी खुशी मिसेज आनन्द के साथ चलने का तैयार हो गया। रास्ते में मिस्टर आनंद ने  अपनी पत्नी से कहा, क्यों इसकों साथ ले जा रही हों,तो मिसेज आनन्द बोली आपके पास तो दिमाग है नही ,मै कितने दिनों से अपनी कामवाली से परेशान हॅूं। अक्सर छुट्टी ले लेती है, कम से कम इससे तो मुक्ति मिलेगी और पैसा भी बचेगां। यह बात हलाकि बहुत धीरे से कही गयी थी पर फिर भी उस लडकें ने सुन ली, लेकिन चुप रहा क्योंकि वह सेाच रहा था कि  शायद यहॅा पर ढाबंे से कम गालियॅा खाने को मिलें। पर जानता था कि उसकी किस्मत नही बदलने वाली।  


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