मेरे दादाजी

09 अगस्त 2016   |  ऋषभ शुक्ला   (2366 बार पढ़ा जा चुका है)

 मेरे दादाजी

मेरा पूरा गाँव मेरे परीवार के प्रत्येक सदस्य को सम्मान की दृष्टी से देखता था, अभी भी वह सम्मान बरकरार है या नहीं यह कहना थोड़ा मुश्किल है | लेकिन जो सम्मान मुझे भी मिलता आया है उसे मै अपनी बड़ी उपलब्धी मानता आया हूँ, (संभवतः अब यह भ्रम टूट गया है)| गाँव में सभी अपनो से बड़ो या छोटो को भी जिन्हें सम्मान देना होता है उसे "पालागी" (इस शब्द को मै अभी तक नमस्ते का समानार्थी शब्द मानता आया हूँ, लेकिन शायद इस शब्द का अर्थ निकलना मेरी सबसे बड़ी भूल होगी) कहकर संबोधित करते है | मेरे दादा जी'>दादाजी जो उस समय ग्राम प्रधान थे जब मै पैदा भी नहीं हुआ था, उन्हें पुरे गाँव बहूत सम्मान की दृष्टी से देखता था, मेरा भ्रम भी अब जाकर टूटा की गाँव वाले मुझे सम्मान देकर दादाजी के प्रती सम्मान प्रदर्शीत करते थे |

मेरे मन की...... - OnlineGatha-The Endless tale आज कल चर्चा है इसी बात पर की,ज़माना असहिष्णु होता जा रहा है |कोई वापस देता तमगा है,तो कोई घर छोड़ जा रहा है ||मै तो हूँ अचंभित,सब को दिख रही असहिष्णुता,दुम दबा के मुझसे ही,क्यों भगा जा रहा है ||मैंने खोजा सब जगह,खेत-खलिहान, बाग़-बगीचे |अन्दर-बाहर, सड़क और नदी,पर मुझे तो कही दिख ना रहा है ||कही फटा बम,तो कही हो रहा हमला |लेकिन पता नहीं क्यों,यह भारत में ही भगा जा रहा है ||Publisher : OnlinegathaEdition : 1ISBN : 978-93-86163-45-5Number of Pages : 142Binding Type : Ebook , PaperbackPaper Type : Cream Paper(58 GSM)Language : HindiCategory : PoetryUploaded On : July 12,2016 Partners :ezebee.com , Ebay , Payhip , Smashwords , Flipkart , shopclues , Paytm , Kobo , scribd मेरे मन की...... - OnlineGatha-The Endless tale

http://www.bookstore.onlinegatha.com/bookdetail/450/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80.......html

अगला लेख: असहिष्णुता व सहिष्णुता



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
04 अगस्त 2016
मेरा नाम …………. छोड़ो भी, मेरे नाम मे क्या रखा है. कहते है लोगो को एक नाम इसीलिए दिए जाते है की वो रहे या ना रहे उन्हे हमेशा पहचाना जा सके, लेकिन फिर भी मै चाहता हूँ, की मेरा नाम एक गुमनाम शक्सियत हो. अब मै आप सभी को रूबरू करने जा रहा हूँ अपने इस अधूरे जिंदगी के सफ़र के बारे मे. मै शुरुआत करना चाहूँग
04 अगस्त 2016
08 अगस्त 2016
आज बात करूंगा परिवार के कुछ सदस्यों के बारे में जिन्हें मै चाहकर भी भुला नहीं सकता मेरा परिवार जिसमे मै भारत देश की एकता और अखंडता को वीद्दमान पाता हूँ, मेरा परिवार एक संयुक्त परिवार है जो भारत में ख़त्म होने की कगार पर है, और मै भारत वर्ष के लोगो से इसके संरक्षण हेतु आगे आने का आह्वान करता हूँ | मेर
08 अगस्त 2016
20 अगस्त 2016
आज का सुवचन
20 अगस्त 2016
04 अगस्त 2016
मेरा नाम …………. छोड़ो भी, मेरे नाम मे क्या रखा है. कहते है लोगो को एक नाम इसीलिए दिए जाते है की वो रहे या ना रहे उन्हे हमेशा पहचाना जा सके, लेकिन फिर भी मै चाहता हूँ, की मेरा नाम एक गुमनाम शक्सियत हो. अब मै आप सभी को रूबरू करने जा रहा हूँ अपने इस अधूरे जिंदगी के सफ़र के बारे मे. मै शुरुआत करना चाहूँग
04 अगस्त 2016
06 अगस्त 2016
मै ........., छोड़िये भी | यहाँ, मेरे नाम से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि यह अधिकप्रभावशाली  नहीं है |मैंने अपने जीवन के २० वर्ष पूरे कर लिए है | मैं  भदोही से हूँ, जो पूरी दुनिया में अपने वस्त्र निर्यात के लिए जाना जाता है। मेरे पास अपने बारे में बताने के लिए कोई और अधिक सामग्री नहीं है, क्योकी मै अ
06 अगस्त 2016
08 अगस्त 2016
आज बात करूंगा परिवार के कुछ सदस्यों के बारे में जिन्हें मै चाहकर भी भुला नहीं सकता मेरा परिवार जिसमे मै भारत देश की एकता और अखंडता को वीद्दमान पाता हूँ, मेरा परिवार एक संयुक्त परिवार है जो भारत में ख़त्म होने की कगार पर है, और मै भारत वर्ष के लोगो से इसके संरक्षण हेतु आगे आने का आह्वान करता हूँ | मेर
08 अगस्त 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x