“कुंडलिया”

11 अगस्त 2016   |  महातम मिश्रा   (62 बार पढ़ा जा चुका है)

“कुंडलिया” - शब्द (shabd.in)

चित्र अभिव्यक्ति आयोजन

“कुंडलिया”

 

सतरंज के विसात पर, मोहरे तो अनेक

चलन लगी है चातुरी, निंदा नियत न नेक    

निंदा नियत न नेक, वजीर घिर गया राजा

गफलत का है खेल , बजाए जनता बाजा

गौतम घोड़ा साध, खेल में खेल न रंज

राजा को दे मात, अढ़ैया पढ़ें सतरंज॥

 

महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी 

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रेणु
20 फरवरी 2017

भूली बिसरी विधा का अनूठा प्रयोग -----

सादर धन्यवाद आदरणीया रेणु जी , हार्दिक स्वागत है

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