शब्दों का अस्तित्व

12 अगस्त 2016   |  कात्यायनी डॉ पूर्णिमा शर्मा   (343 बार पढ़ा जा चुका है)

शब्दों का अस्तित्व यही, पल भर में व्यर्थ वो हो जाते हैं |

किन्तु मौन की भाषा को सब युगों युगों तक दोहराते हैं.........


https://purnimakatyayan.wordpress.com/2016/08/12

शब्दों का अस्तित्व यही, पल भर में व्यर्थ वो हो जाते हैं

किन्तु मौन की भाषा को सब युगों युगों तक दोहराते हैं |

पल भर को एक कथा सुनाकर शब्द राह अपनी चल देते

किन्तु मौन में जड़े शब्द निज छाप अमिट पड़वा जाते हैं ||

शब्दों से कोलाहल बढ़ता, नित नवीन कोई घटना घटती

और विचित्र कोई अर्थ बताकर इतिहासों में गुम हो रहती |

किन्तु मौन के अर्थ अनेकों, शान्त हृदय से समझे जाते

और नया एक काव्य रचाकर अजर अमर वो हो जाते हैं ||

शब्दों का क्या, होठों पर आते ही बासी हो जाते हैं

और पकड़ ले अगर लेख नी, मूक चित्र तब बन जाते हैं |

किन्तु मौन की अथक साधना में है देखो कितनी क्षमता

भाव होठ तक आते आते अमृत ही बरसा जाते हैं ||

बिना मौन का साधन करके शब्द अगर होठों पर आते

अर्थहीन, बलहीन बने वे भाव नहीं पूरे कह पाते |

पलें मौन के गर्भ तो उनमें अनगिन भाव तरंगित होते

अमिट छाप तब छोड़ें मन पर, सार्थकता वे पा जाते हैं ||

इसीलिये अर्थों को खोजो मौन की गहराई में जाकर

मत उलझाओ शब्दों में उनकी उस अनुपम सुंदरता को |

शब्दों का अस्तित्व शून्य है, पल भर में ही खो जाएगा

मौन की भाषा में सजकर ही शब्द अमरता पा जाते हैं ||

850636608_83644

§

शब्दों का अस्तित्व यही, पल भर में व्यर्थ वो हो जाते हैं

किन्तु मौन की भाषा को सब युगों युगों तक दोहराते हैं |

पल भर को एक कथा सुनाकर शब्द राह अपनी चल देते

किन्तु मौन में जड़े शब्द निज छाप अमिट पड़वा जाते हैं ||

शब्दों से कोलाहल बढ़ता, नित नवीन कोई घटना घटती

और विचित्र कोई अर्थ बताकर इतिहासों में गुम हो रहती |

किन्तु मौन के अर्थ अनेकों, शान्त हृदय से समझे जाते

और नया एक काव्य रचाकर अजर अमर वो हो जाते हैं ||

शब्दों का क्या, होठों पर आते ही बासी हो जाते हैं

और पकड़ ले अगर लेखनी, मूक चित्र तब बन जाते हैं |

किन्तु मौन की अथक साधना में है देखो कितनी क्षमता

भाव होठ तक आते आते अमृत ही बरसा जाते हैं ||

बिना मौन का साधन करके शब्द अगर होठों पर आते

अर्थहीन, बलहीन बने वे भाव नहीं पूरे कह पाते |

पलें मौन के गर्भ तो उनमें अनगिन भाव तरंगित होते

अमिट छाप तब छोड़ें मन पर, सार्थकता वे पा जाते हैं ||

इसीलिये अर्थों को खोजो मौन की गहराई में जाकर

मत उलझाओ शब्दों में उनकी उस अनुपम सुंदरता को |

शब्दों का अस्तित्व शून्य है, पल भर में ही खो जाएगा

मौन की भाषा में सजकर ही शब्द अमरता पा जाते हैं ||

850636608_83644

• कवियित्री, लेखिका, ज्योतिषी | ज्योतिष और योग से सम्बन्धित अनेक पुस्तकों का अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद | कुछ प्रसिद्ध मीडिया कम्पनीज़ के लिये भी लेखन | प्रकाशित उपन्यासों में अरावली प्रकाशन दिल्ली से देवदासियों के जीवन संघर्षों पर आधारित उपन्यास “नूपरपाश”, भारत के मध्यमवर्गीय परिवारों में नारियों के संघर्षमय जीवन की झलक प्रस्तुत करता भारतीय पुस्तक परिषद् दिल्ली से प्रकाशित उपन्यास “सौभाग्यवती भव” और एशिया प्रकाशन दिल्ली से स्त्री पुरुष सम्बन्धों पर आधारित उपन्यास का प्रथम भाग “बयार” विशेष रूप से जाने जाते हैं | साथ ही हिन्दी अकादमी दिल्ली के सौजन्य से अनमोल प्रकाशन दिल्ली से प्रकाशित “मेरी बातें” नामक काव्य संग्रह भी पाठकों द्वारा काफी पसन्द किया गया | • WOW (Well-Being of Women) India नामक रास्ट्रीय स्तर की संस्था की महासचिव के रूप में क्षेत्र की एक प्रमुख समाज सेविका | • सम्पर्क सूत्र: E-mail: katyayanpurnima@gmail.com View all posts by purnimakatyayan

 August 12, 2016 – purnimakatyayan

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