उड़ा भी दो सारी रंजिशें इन हवाओं में यारो

16 अगस्त 2016   |  रोहित   (536 बार पढ़ा जा चुका है)

उड़ा भी दो सारी रंजिशें इन हवाओं में यारो, 

छोटी सी जिंदगी है नफ़रत कब तक करोगे, 

घमंड न करना जिन्दगी मे तकदीर बदलती रहती है, 

शीशा वही रहता है बस तस्वीर बदलती रहती है.. 

अगला लेख: क्या आप कश्मीर में हो रहे विद्रोह का साथ देंगे ?



बात तो अच्छी कही है ... थोड़ा काम भी कर लिया करिए

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x