ताकता बचपन .

16 अगस्त 2016   |  स्पर्श   (156 बार पढ़ा जा चुका है)




अब वो नमी नहीं रही इन आँखों में 
शायद दिल की कराह अब,
रिसती नही इनके ज़रिये 
या कि सूख गए छोड़
पीछे अपने  नमक और खून

क्यूँ कि अब कलियों बेतहाशा रौंदी जा रही हैं 
क्यूंकि फूल हमारे जो कल 
दे इसी बगिया को खुशबू अपनी 
करते गुलज़ार ,वो हो रहे हैं तार तार 
क्यूंकि हम सिर्फ गन्दी? और बेहद नीच 
एक सोच के तले दफ़न हुए जा रहे हैं 
या कि महफूज़ अपनी ही 
नन्ही जानों को  नही कर पा रहे हैं ..
या कि तमाशबीन बन बीन सिर्फ बजा रहे हैं 
या कि नीतियों और रणनीतियों में पिसे 
नग्न कुरूपतम मानसिकता को 
अफ़सोस रुपी लिफाफा थमा 
इतिश्री कर्त्तव्य की किये जा रहे हैं 
कौन है वो सत्रह  साल का जुवेनाइल 
और कौन वो ढाई और पांच साल की मेरी क्यूट परियाँ
कौन है वो अखबार के आठवें पन्ने पर 
महिला सशक्तिकरण के बीच खामोश सिसकियाँ सुनाता 
सोलह साल का यौन शोषण का शिकार लडका

क्या और क्यों हैं 
ये तक़लीफ़ में हैं पड़े हुए 
कि हम जुवेनाइल की उम्र 
अपराध की पाशविकता या 
उसकी मानसिक परिपक्वता के 
कुछ निर्णय कर ही नही पा रहे 
कि रिमांड होम्स सुधारेंगे 
इन्ही किशोर मनों को 
क्या हम बच्चों को सुधारना चाहते हैं 
या हम उन्हें सुधार के नाम पर 
और भयावह अपराधियों की शक़ल 
में चाहते हैं बदलना

या कि हम तह में मनोवि ज्ञान की जाएंगे 
खोजेंगे तरीके नए जिनमें 
हम दे पाएंगे हमारे सभी बच्चों को बराबर 
हक़ की ज़िंदगी , इज़्ज़त ,
आज़ादी और सुरक्षा की
शिक्षा और प्यार से भरपूर 
दरिंदगी से दूर 
बसा पाएंगे एक दुनिया 
ऐसी कि महफूज़ शब्द महज एक 
धूल धूसरित रक्त रंजित 
किताब न रह जाए ?

अगला लेख: ' सशक्तिकरण,सत्ता,और औरत '



रेणु
22 मार्च 2017

बहुत ही हृदयस्पर्शी वर्णन -

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
12 अगस्त 2016
छो
भारत हो या कोई भी देश हो हर माता पिता अपने बच्चों को असीम प्रेम करते है जिसका ऋण कोई भी नहींउतार सकता । पर असीम प्रेम करने पर बच्चों पर क्या क्या भीत सकती है शायद वो भी नहीं सोचते । मै एक ऐसा ही वाक्या बताने जा रहा हूँ । यदि आपके 2 बच्चें है और कोई विपत्ति या आपदा आती है जिसमें आप या तो अपने अपने आप
12 अगस्त 2016
20 अगस्त 2016
@@@@ कथित आधी घरवाली @@@@ ****************************************** उससे है रिश्ता ऐसा जो बोलचाल में गाली है | नाम है गुड्डन उसका,वो मेरी प्यारी साली है || शालीनता की प्रतिमूर्ति,वो नजर मुझको आती है | शर्म के मारे वो साली मेरी,छुईमुई बन जाती है || जब कभी किसी बात पर,वो म
20 अगस्त 2016
16 अगस्त 2016
  तुम कितनी शांत हो गयी हो अब ,बीरान सी भी .वो बावली बौराई सरफिरीलड़की कहाँ छुपी है रे ? जानती हो , कितनी गहरी अँधेरी खाइयों मेंधकेल दी जाती सी महसूसती हूँ खुद कोजब तुम्हारे उस रूप को करती हूँ याद . क्यों बिगड़ती हो यूँ ?जानती हो न ,तु
16 अगस्त 2016
05 अगस्त 2016
<!--[if gte mso 9]><xml> <o:OfficeDocumentSettings> <o:RelyOnVML/> <o:AllowPNG/> </o:OfficeDocumentSettings></xml><![endif]--><!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSc
05 अगस्त 2016
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x