व्यथा ,'सूरज' होने की .

16 अगस्त 2016   |  स्पर्श   (118 बार पढ़ा जा चुका है)


बिजली की लुका छुपी के खेल और ..
चिलचिल गर्मी से हैरान परेशां हम ..
ताकते पीले लाल गोले को 
और झुंझला जाते , छतरी तानते, आगे बढ़ जाते !
पर सर्वव्यापी सूर्यदेव के आगे और कुछ न कर पाते ..!



पर शाम आज , सूरज के सिन्दूरी लाल गोले को देख 
एक दफे तो दिल 'पिघल' सा गया , 
सूरज दा के लिए , मन हो गया विकल 
रोज़ दोपहरी आग उगलने वाले इस लाल गोले ने 
माथे पर पसरी पसीने की बूंदों ने 
कर दिया यूँ व्याकुल ...

पर पूछो तो भला क्यूं ?
आओ सुनाती हूँ , किस्सा सूरज और आग के रिश्ते का !




तस्वीर खींचते वक़्त तो बड़ा लाड़ आया उसके गोल मटोल होने पे ,
बाल हनुमान का भी ख्याल हो आया , 
लगा भर लूँ , हथेली में और 
बस ,अहा ...पर बोलो भला ...
सूरज की तपिश को मैं एक अदनी सी लड़की कैसे कैद करूँ !

दिल मेरा पिघला क्यूँ , ये तो बता दूं ! 



हाँ, तो वो ऐसे कि ,
सूरज दादा ने सारे जहां की गर्मी समेटी है खुद में 
पर उन के जलने की तक़लीफ़ का क्या ! 
वो रिश्ता जो आग और उनके अटूट साथ का है , 
जलते पतंगे की तरह जलते सूरज और 
..उसकी संगिनी आग का क्या !



रिश्ते कुछ ऐसे भी तो होते हैं न ,
जिनकी किस्मत सागर और तरिणी की जैसी कहाँ..
उनके ,जिनके शीतल प्रेम के मिलन में ,

तमाम प्यार की कहानियों की मिसालें जा मिलें !



यहाँ सिर्फ सारी कुदरत की ज़िम्मेदारियों का बोझ है 
प्रकृति चक्र की फ़िक्र है , याद है वो कहानी  
जब सूरज दादा के विलुप्त होने से सब थम गया था ...

और इसीलिए सूरज दा और उनकी साथी जलते , तड़पते हैं ,
मगर साथ हैं .



प्रेम शीतल हो , ज़रूरी तो नही , 
मुक़म्मल हो ,शायद ये भी नही

पर तपिश हर प्रेम की नियति है , ज़रूर !

प्रेम की अंतहीन इसी नियति के साक्षी हैं
सूरज दादा और उनकी साथी.

अगला लेख: ' सशक्तिकरण,सत्ता,और औरत '



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
16 अगस्त 2016
दो
 पसीने से अमोल मोती देखे हैं कहीं ?कल देखा उन मोतियों को मैंनेबेज़ार ढुलकते लुढ़कतेमुन्नार की चाय की चुस्कियों का स्वादऔर इन नमकीन जज़्बातों का स्वादक्या कहा ....बकवास करती हूँ मैं !कोई तुलना है इनकी ! सड़कों पर अपने इन मोतियों की कीमतमेहनतकशी की इज़्ज़त ही तो मांगी है इन्होंनेसखियों की गोद में एक झपकी ले
16 अगस्त 2016
04 अगस्त 2016
काफीसमय बाद वह घर आया था बड़ी बहन की शादी में। घर में गहमा गहमी का माहौल था। काफीचहल पहल थी। ढेर सारे रिश्तेदार, गाना बजाना, नाचना लगा हुआ था। कहीं मेहंदी लग रही है, कहीं साड़ी में गोटा।कहीं दर्जी नाप ले रहा है, कोई हलवाई को मिठाइयों के नाम लिखवा रहा है। एक तरफ फूलमाला वाले की गुहार, एक तरफ बैंड-बाजा
04 अगस्त 2016
02 अगस्त 2016
कुछ बात होंठ पर टीके रहेकुछ घबराहट थी सो सिले रहेहोंठो पे रखे ये धीर-अधीरबस स्वर-सुधा को तरस रहे/                             भ्रमजाल-जाल ये यौवन का                             ये कू-कू कोयल सी बोली                             अगर यही मुहूर्त है मिलने का                             तो क्यूँ ना हर दि
02 अगस्त 2016
16 अगस्त 2016
 14 साल की और 21 साल की मेरी दो बहनें आई पीएस और आई ए एस बनना चाहती हैं . सुनकर ही अच्छा लगेगा .लडकियां जब सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने को खुद की और दुनिया की कमज़ोरियों से जीतती हैं तो लगता है अच्छा .बेहतर और सुखद. खासकर राजनीति ,सत्ता और प्रशासन के गलियारे और औरतें .वहां जहाँ औरतें फिलहाल ग्र
16 अगस्त 2016
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x