बो विश्वगुरु भारत देश कठे

20 अगस्त 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (249 बार पढ़ा जा चुका है)


@@@@@ बो विश्वगुरु भारत देश कठे @@@@@
*******************************************************
मानवता है धर्म जकारो ,बे मिनख भलेरा आज कठे |
भ्रष्टाचार ने रोक सके , इसो भलेरो राज कठे ||
पति रो दुखड़ो बाँट सके ,बा सती सुहागण नार कठे|
घर ने सरग बणा सके ,बा लुगाई पाणीदार कठे ||
लुगाई ने सम्भाळ सके ,बो मर्द असरदार कठे|
धणयाणी ने समझ सके ,बो धणी समझदार कठे||
भरोसो नहीं टूटे किरोई ,इसो अबे व्योहार कठे |
खोट -मिलावट नहीं होवे ,इसो अबे व्योपार कठे||
माने माँ -बाप रो कहणो ,इसी अबे औलाद कठे|
जंग नहीं लागे जिण में, इसो अबे फौलाद कठे ||
देश रे खातिर मर मिटे ,इसा नेता आज कठे|
जनता रो दुखड़ो मिटा सके ,इसो अबे राज कठे||
आबादी ने रोक सके ,जनता में इसी जाग कठे|
गरीबी नहीं रेवे देश में ,देश रा इसा भाग कठे ||
झूठ -कपट ने रोक सके, इसा अबे लोग कठे |
सारा लोग सुखी हो जावे ,इसा अबे जोग कठे ||
बोली में मिश्री घोळ सके ,बा कोकिल कंठी नार कठे |
हिरदे में हेत जगा सके ,बा जीणे री आधार कठे ||
तन -मन ने निरोग राखे,इसी अबे खुराक कठे |
जुर्मी डर सू धूजण लागे ,पुलिस री इसी धाक कठे||
कायर ने वीर बणा सके ,कवियां रो बो सन्देश कठे |
दुश्मन धूजे जिण रे सामे ,वीरां रो बो देश कठे ||
देवी रो रूप दिखे जिण में ,छोरयाँ रो बिसो वेश कठे|
दुनिया ने मार्ग दिखाणे वाळो ,बो विश्वगुरु भारत देश कठे||
************************************************************

अगला लेख: कथित आधी घरवाली



इंजी. बैरवा
22 सितम्बर 2017

अच्छा लिखा है

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
04 सितम्बर 2016
तेरी तरहा मैं हो नहीं सकता नहीं ये करिश्मा हो नहीं सकतामैंने पहचान मिटा दी अपनी भीड़ मे अब खो नहीं सकताबहुत से काम याद रहते है दिन मे मैं सो नहीं सकताकि पढ़ लूँ पलकों पे लिखी इतना सच्चा हो नहीं सकतासमीर कुमार शुक्ल
04 सितम्बर 2016
02 सितम्बर 2016
जब नौकरी दिलवाने,शादी करवाने ,मकान/फ्लैट,भूखंड बेचने का झांसा देकर रकम हड़पने वाले ठगों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो सकती है तो सर्वजनिक रूप से विदेशों से काला धन 100 दिनों में भारत लाकर प्रत्येक भारतीय के खाते में पंद्रह पंद्रह लाख रुपये जमा करवाने का आश्वासन देकर मतदाताओं को फुसला कर उनसे वोट हासिल
02 सितम्बर 2016
20 अगस्त 2016
@@@@ कथित आधी घरवाली @@@@ ****************************************** उससे है रिश्ता ऐसा जो बोलचाल में गाली है | नाम है गुड्डन उसका,वो मेरी प्यारी साली है || शालीनता की प्रतिमूर्ति,वो नजर मुझको आती है | शर्म के मारे वो साली मेरी,छुईमुई बन जाती है || जब कभी किसी बात पर,वो म
20 अगस्त 2016
26 अगस्त 2016
@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@घोर मंहगाई के इस दौर में , जान इन्सान की सस्ती है |जिसने जितना ठगा किसी को, उसकी उतनी हस्ती है ||पर न हिम्मत हार ओ नेक इन्सान नसीब इसे मान कर ,भ्रष्टाचार के भँवर में भी, नहीं डूबती ईमान की कश्ती है ||@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@
26 अगस्त 2016
03 सितम्बर 2016
का
@@@@@@@@@@@@@@@@@@काव्य की विधाएँ विविध,है अलग सबकी पसन्द |गीत,गजल,दोहा,भजन,कविता शेर और छन्द ||कविता शेर और छन्द, नवरस के रंग बरसाए ,कुण्डी खोल दिल -द्वार की , मार्ग सही दिखाएँ ||@@@@@@@@@@@@@@@@@@
03 सितम्बर 2016
22 अगस्त 2016
कु
हर मोड़ पर मिलते है यहाँ चाँद से चेहरेपहले की तरह क्यो दिल को नही भाते ||बड़ी मुद्दतो बाद लौटे हो वतन तुम आजपर अपनो के लिए कुछ आस नही लाते ||काटो मे खेल कर जिनका जीवन गुज़राफूलो के बिस्तर उन्हे अब रास नही आते||किसान, चातक, प्यासो आसमा देखना छोड़ोबादल भी आजकल कुछ खास नही आते ||
22 अगस्त 2016
24 अगस्त 2016
व्यंग लेख --अपने देश की "महानता"के क्या कहने******************************************************मैं अपने देश भारत की उदारता को नमन करता हूँ |यही तो वो देश है ,जहाँ एक अनाचारी ,दुराचारी ,भ्रष्टाचारी ,अत्याचारी और बलात्कारी व्यक्ति स
24 अगस्त 2016
22 अगस्त 2016
@@@@@@@ कमाई @@@@@@@*************************************************एक तरफ वेतन वाली,एक तरफ घूस वाली |एक कहे मैं बीवी , दूजी कहे मैं साली ||धर्मपत्नी सी वेतन वाली,रखेल जैसी घूस वाली |एक दिलाए इज्जत ,दूजी दिलाए गाली ||एक तरफ वेतन वाली,एक तरफ घूस वाली |एक कहे मैं बीवी , दूजी कहे मैं साली ||शरबत जैसी
22 अगस्त 2016
25 अगस्त 2016
टिमटिमाते तारे की रोशनी में मैंने भी एक सपना देखा है । टुटे हुए तारे को गिरते देखकर मैंने भी एक सपना देखा है । सोचता हूं मन ही मन कभी काश ! कोई ऐसा रंग होता जिसे तन-बदन में लगाकर सपनों के रंग में रंग जाता । बाहरी रंग के संसर्ग पाकर मन भी वैसा रंगीन हो जाता । सपनों से जुड़ी है उम्मीदे
25 अगस्त 2016
26 अगस्त 2016
@@@@ अपने हुनर को तराश इतना @@@@****************************************************अपने हुनर को तराश इतना ,कि तूदुनिया का सरताज हो जाये |हर ताज रहे तेरी ठोकर में ,और तू बादशाह बेताजहो जाये||अपने इल्म को निखार इतना, कि हर नजर दीदारको बेताब हो जाये |छू ले तू हर बुलन्दी को , और सच्चे तेरे ख्वाबहो जाये
26 अगस्त 2016
26 अगस्त 2016
@@@@ अपने हुनर को तराश इतना @@@@****************************************************अपने हुनर को तराश इतना ,कि तूदुनिया का सरताज हो जाये |हर ताज रहे तेरी ठोकर में ,और तू बादशाह बेताजहो जाये||अपने इल्म को निखार इतना, कि हर नजर दीदारको बेताब हो जाये |छू ले तू हर बुलन्दी को , और सच्चे तेरे ख्वाबहो जाये
26 अगस्त 2016
04 सितम्बर 2016
धूप मे धूप साये मे साया हूँ बस यही नुस्का आजमाया हूँएक बोझ दिल से उतर गया कई दिनों बाद मुस्कुराया हूँदीवारें भी लिपट पड़ी मुझसेमुद्दतों के बाद घर आया हूँउसे पता नहीं मेरे आने का छुप कर के उसे बुलाया हूँ समीर कुमार शुक्ल
04 सितम्बर 2016
23 अगस्त 2016
मध्यप्रदेशऔरछत्तीसगढ़मेंबाढसेतबाहीमुख्यमंत्री ने अफसरों के साथ समीक्षा की उत्तर प्रदेश में सभी नदियों का जलस्तर बढ़ा मुख्यमंत्री और उनके चाचा एक मंच पर दिखे प्रधानमंत्री पाक अधिकृत कश्मीर पर चिंतित उम्र ने अपना घर संभालने की नसीहत दीदिल्ली का मुख्यमंत्री जनमत संग्रह कराएगाप्रधानमन्त्री को भी काम करना
23 अगस्त 2016
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x