पानी के लिए बलिदान?

22 अगस्त 2016   |  जीतेन्द्र कुमार शर्मा   (80 बार पढ़ा जा चुका है)



सागर झीललक्खी बंजारा अपने कबीले का मुखिया था। उसका घुमंतू कबीला सारे देश में घूम-घूम कर गुड़ नमक का व्यापार करता था। यह दल अधिकांश सागर में भी ठहरता था। उन दिनों भी वहां पानी की किल्लत थी। उनके मवेशी अक्सर मर जाते थे। इससे निजात पाने के लिए लक्खी ने एक तालाब खोदने का ठेका 100 मजदूरों को दे दिया। दो साल तक लगातार खुदाई हुई पर एक बूंद पानी नहीं निकला। तब लक्खी ने वरुण देवता का कठिन तप किया। देवता प्रसन्न हुए और उसके सपने में आए। देवता ने लक्खी को कहा कि यदि वह अपने इकलौते बहु-बेटे को तालाब में समर्पित कर दे तो पानी सकता है।

लक्खी ने यह सपना अपने परिवार मित्रों को बताया। समाज के कल्याण के लिए उसने अपने बहु-बेटे को बलिदान करने की ठान ली। कबीले वालों ने विरोध भी किया, पर बेटा मिट्ठू और बहु सुखिया ने जल समाधि लेने का प्रण कर लिया। तालाब के बीचों-बीच एक हिंडोला डाला गया। मिट्ठू और सुखिया उसमें बैठे। जैसे ही हिंडोला झुलाना शुरू हुआ, तालाब में पानी आने लगा। दोनों वहीं डूब गए पर अपने पीछे पानी की विशाल लहरें छोड़ गए। आज भी बंजारे इस तालाब का पानी नहीं पीते हैं

शायद इस कहानी पर यकीन ना हो, पर मध्यप्रदेश के सागर के उपलब्ध सभी पुराने दस्तावेजसागरकी यही कहानी कहते हैं। कोई पांच सौ साल पहले यह तालाब 1200 एकड़ से बड़ा हुआ करता था। साल-दर-साल यह सिमटता जा रहा है। भारत के अलग-अलग राज्यों में पुराने तालाबों के निर्माण की लगभग ऐसी ही मिलती-जुलती कहानियां प्रचलित हैं। लब्बोलुवाब यह है कि इन जल-कुंडों को तैयार करने के लिए हमारे पुरखों ने अपना बहुत-कुछ न्योछावर किया था, जिसे आधुनिकता की आंधी निगल गई है।

अगला लेख: एक बाल श्रमिक की दास्तान



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
16 अगस्त 2016
 स्वतंत्रता संग्राम : बुलंद नारों की बुलंद दास्तां यहां बजा बिगुल विद्रोह काए नारों ने भरी हुंकारहिली हुकूमत अंग्रेजों की जब चले शब्दों के बाणजरूरी नहीं कि भावों को व्यक्त करने के लिए हमेशा शब्दों का इस्तेमाल किया जाए लेकिन जब बात तीव्र और सशक्त अभिव्यक्ति की हो तो शब
16 अगस्त 2016
12 अगस्त 2016
"
"सत्यार्थ प्रकाश" को पढकर बडे-बडे कट्टर लोग  बदल गये, आर्य (हिन्दू या सनातनी) हो गये !(१.) वर्तमान में महेन्द्रपाल आर्य जो कि अमृतसरमें फारसी भाषा के विद्वान मौलवी थे ! २००३ से जाकिर नाइक को चैलेन्ज कर रहे है मगर आज तक हिम्मत नही हुई डिबेट कीआज जाकिर नायक भी इनसे डिबेट करने से कतराता है !(२.) जिसे प
12 अगस्त 2016
27 अगस्त 2016
सा
साक्षी मलिक का संघर्ष और उपलब्धियां!ब्राजील के रियो डि जेनेरियो में हुए 2016 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक में महिला कुश्ती का कांस्य पदक जीत कर इतिहास रचने वाली साक्षी समाज और परिवार से लड़ कर इस मकाम तक पहुंची है। क्योंकि एक लड़की पहलवान बने, न तो यह उसके मां-बाप को मंजूर था और न उनके पहलवान दादाजी को ही।
27 अगस्त 2016
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x