हाँ रे मिनख जाग जा

22 अगस्त 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (183 बार पढ़ा जा चुका है)

@@@@@@ हाँ रे मिनख जाग जा @@@@@@

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हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो रे |

क मिनख जाग जा |

नेता लुटे अफसर लुटे,मिलकर सारा लूटे रे |(2)
क अंग्रेजां री लूटपाट ,अब फीकी पड़गी रे ||
क मिनख जाग जा |
हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो रे |
क मिनख जाग जा |
नकली घी दूध ने बेचे ,बेचे धर्म-ईमान रे |(2)
क सच्चाई रो सोनो अब, पीतल सू मिलाग्यो रे ||
क मिनख जाग जा |
हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबणरो खतरों नेड़े आग्यो रे |
क मिनख जाग जा |
खुद बाड़ खेत ने खावे ,बेटी सू रास रचावे रे |(2)
क पशुता रो घोर अंधेरो ,अब मुल्क में छाग्यो रे ||
क मिनख जाग जा |
हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो रे |
क मिनख जाग जा |
बहिन बेच बेटी ने बेचे , बेचे शर्म इन्सान रे |(2)
क पाप्याँ रो पुरानो धंधो,अब खुले में चल्ग्यो रे ||
क मिनख जाग जा |
हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो रे |
क मिनख जाग जा |
चोरी करे जारी करे ,डाले खूब डकेती रे |(2)
क भरोसे रो बेड़ो अब डूबण लाग्यो रे ||
क मिनख जाग जा |
हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो रे |
क मिनख जाग जा |
घूस खावे माँस खावे,खावे देश री बोटी रे |(2)
क भूख रो भतुलियो,अब आकाशा चढ़ग्यो रे ||
क मिनख जाग जा |
हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो रे |
क मिनख जाग जा |
खाणे में खोट पाणी में खोट,खोटो सब व्योपार रे |(2)
धर्म- कर्म रो दिवलो ,अब भारत में बुझ्ग्यो रे ||
क मिनख जाग जा |
हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो रे |
क मिनख जाग जा |
कवि सोये लेखक सोये ,सोयी सारी जनता रे |(2)
सगळा ने जगावण खातिर, दुर्गेश आग्यो रे ||
क मिनख जाग जा |
हाँ रे मिनख जाग जा ,क डूबण रो खतरों नेड़े आग्यो रे |
क मिनख जाग जा |

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