गाथा भारत महान की

24 अगस्त 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (98 बार पढ़ा जा चुका है)

@@@@@@गाथा भारत महान की @@@@@@

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बातें करते बड़ी-बड़ी हम ,नीति आदर्श और शान की |

गाथा सुनो तुम साथियों, इस भारत देश महान की ||

पीने लगी है दूध मूर्ति,यह बात फैली थी गली-गली |

वि ज्ञान के इस युग में भी,यहाँ रूढ़ियाँ फैली हैं सड़ी-गली ||

कन्या को देवी समझ कर , पूजा भारत में जाता है |

पर कन्या-भ्रूणहत्या का, इस मुल्क से गहरा नाता है ||

निर्दोष सम्बुक के हत्यारे को,भगवान् यहाँ माना जाता है |

सती पत्नी का निष्कासक , पुरुषोतम यहाँ कहलाता है ||

जिस गंगा को माता कहते,हम उसमें गंद बहाते हैं |

और भ्रष्टाचार के हमाम में , नंगे होकर नहाते हैं ||

रोक न सका जो युध्द को,वो भगवान यहाँ कहलाता है |

बहलिये के एक तीर से , मृत्यु जो पा जाता है ||

जो गरीब व्यक्ति जीवन में,भरपेट भोजन नहीं पाता है |

उस निर्धन व्यक्ति पर भी , मृत्युभोज लादा जाता है ||

श्रध्दा में हम अंधे हैं इतने ,कि सच नहीं देता दिखायी |

लुट गया मन्दिर सोमनाथ का,समझ फिर भी नहीं आयी ||

चोरी हो जाती मंदिरों में,नहीं रोकता वो कथित भगवान |

सच कहना हक़ है मेरा , झूठ कहूँ तो कटे जुबान ||

पाखण्डी लूट रहे लोगो को,यहाँ भगवान के नाम पर |

स्वर्ग की टिकट बुक करते हैं ,वो मूंह माँगे दाम पर ||

बेतुकी बातें मानने वाले ,मिल जाते हैं भरपूर यहाँ |

भारत जैसा देश ठगों का,इस दुनिया में और कहाँ ||

असली से ज्यादा नकली माल,यहाँ मिल जाता बाजार में |

इन्सान बिक जाता इस देश में , केवल चन्द हजार में ||

संयम का पाठ पढ़ाते सबको, पर खुद घोर विलासी हैं |

प्रमाण है जनसंख्या अपनी,खुजराहो और देवदासी हैं ||

हम भारतीय बढ़-चढ़ कर , स्वदेशी का ढोल बजाते हैं |

पर अपनी झूठी शान के खातिर,अंग्रेजी में बतियाते हैं ||

उपदेश देते हम प्रेम का ,पर बातों से जहर फैलातें हैं |

तरसे गरीब दूध को चाहे ,पर मूर्त पर व्यर्थ बहाते है ||

जागृत करो सोयी जनता को , ओ कलम के वीरों |

ज्ञान जगा कर आम जान का ,बन जाओ देश के हीरो ||

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