पुरस्कार राशि

24 अगस्त 2016   |  विष्णु द्विवेदी   (52 बार पढ़ा जा चुका है)

क्या नायक वही होते हैं जो जंग जीतते है या फिर वो
भी नायक है जो जंग लड़ते है ,मुझे तो लगता है प्रत्येक वो व्यक्ति नायक है जो जंग को अप्रत्याषित मोड़ तक ले जाता है । फिर क्यों धन वर्षा सिर्फ जंग जीतने वालों पर हाँ यह लेख पूरी तरह से ओलम्पिक के संदर्भ में हैंं जो जीते हैं वो तो नायक है ही पर जो हारे उनके जिम्मेदारयही है जो पुरस्कार राशि बाँटने वालों में ये तो राशि बाँटकरमौका भुनाना चाहते है अगर इतनी खेल के प्रति श्रद्धा हैतो आपकी वजह से हारे हैं उन्हें भी दीजिए नहीं लेकिन उन्हें कैसे दे वो तो इनके लिए ज्यादा मुनाफे का सौदा नहीं 15अगस्त को भारतीय दूतावास में कार्यक्रम होता है भारतीय खाने के लिए तरसते भारतीय खिलाड़ियों को भुंजी भांग की तरह मूंगफली कॉफी ,बीयरऔर चाय केसाथ पकड़ा दी जाती खिलाड़ी मन मसोस के रह जाते हैं जो कि अपना लंच छोड़ के आए थे , विकास कृष्ण
उनका तो मैच था उस दिन । खैर देश की37 सरकारों से कहीं बेहतर सलमान रहे जिन्होंने 118 खिलाड़ियों कोराशि देने को कहा है। सरकारें 118 खिलाड़ियों के लिए एक डॉक्टर नहीं भेज पाती हैं और सिन्धु के पदक जीतने पर जाति देखी जाती है, पता लगाया जाता है कि हमारेवोटबैंक पर क्या असर पड़ेगा फिर दूसरे दिन उन दो सरकारों में से जिसे ज्यादा धनात्मक परिणाम की आशंका होती है वो पुरस्कार की घोषणा कर देती है । ये है हमारी मतलब इनकी खेल भावना

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