अपने देश की "महानता"के क्या कहने

24 अगस्त 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (191 बार पढ़ा जा चुका है)

व्यंग लेख --अपने देश की "महानता"के क्या कहने

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मैं अपने देश भारत की उदारता को नमन करता हूँ |यही तो वो देश है ,जहाँ एक अनाचारी ,दुराचारी ,भ्रष्टाचारी ,अत्याचारी और बलात्कारी व्यक्ति साधू का वेश धारण कर महा ज्ञान ी के रूप में विख्यात हो जाता है | करोड़ों रुपयों में खेल ने वाला घोर लालची आदमी त्यागी के रूप में ख्याति प्राप्त कर लेता है | कृष्ण का रूप धर कर युवतियों रुपी गोपियों से रास रचाने वाला पाखण्डी अखण्ड ब्रह्मचारी का रुतबा हासिल कर लेता है |

जनता को दोनों हाथों से लूटने वाला न जाने कैसे सन्त के रूप में प्रतिष्ठित हो जाता है |

पुरुष उन पर अपना धन लुटाते हैं और नारियां अपना तन |आखिर क्यों ?

कोई खरा आदमी खरी बात करता है तो कोई नहीं सुनता और सुन लेता है तो गुनता नहीं |जबकि खरा आदमी न तो किसी से चन्दा मांगता है न किसी नारी की अस्मत |

पर ढोंगी बाबा या बापू ये दोनों मांगते हैं और उन्हें ये दोनों मिल जाते हैं वो भी ख़ुशी और सम्मान के साथ |नारियां अपने अच्छे- भले पति को छोड़ कर इन ढोंगी बाबाओं को अपना पति -परमेश्वर मान लेती हैं और बिना फेरे लिए इनके फेर में पड़कर अपनी बसी बसायी गृहस्थी उजाड़ लेती हैं |आखिर इन ढोंगी बाबाओं के पास ऐसा क्या है कि लोग अपना तन,मन और धन लुटा कर भी उनके सानिध्य को तरसते हैं |क्या एक -दो भविष्यवाणियाँ संयोग वश सच निकालने भर से जनता उन्हें सिर आँखों पर बिठा लेती हैं ?या क्या वे लोगों का ब्रेनवाश करने या उन्हें सम्मोहित करने में सक्षम हैं ?कुछ लोगों को तो मुर्ख बनाया जा सकता है पर लाखों लोगों को मुर्ख बनाना बहुत ही कठिन है |आश्चर्य तो यह है कि बाबाओं द्वारा मूर्ख बनाये लोगों मे उच्च शिक्षित लोग भी कम नहीं होते |कोई भला आदमी यदि मुफ्त में भली बात कहता है तो लोग उसकी कोई क़द्र नहीं करते |ढोंगी बाबा अपने दर्शनों तक के पैसे वसूलते हैं |शायद इसलिए लोग उनकी कदर करते हैं |यह तो दिमाग का दिवालियापन ही है कि लाल की बजाय हरी चटनी,समोसे की बजाय कचोरी खाने से कृपा बरसाने वाले बाबा को सुनने के लिए लोग हजारों रुपये पेशगी जमा कराते हैं |इधर इस लेख का लेखक है जो अपनी उच्च स्नातक शिक्षिका पत्नी को भी अंध विश्वास से मुक्त नहीं कर पाया| क्या विद्वान पाठक गण मुझे यह बतायेंगें कि उन झांसेबाज बाबाओं के पास ऐसा क्या है कि उनकी बेतुकी बातों को भी लोग मान लेते हैं जबकि वे मेरी तर्क पूर्ण बातों को भी सिरे से नकार देते हैं|

क्या मैं सही ढंग से अपना पक्ष प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं हूँ ?

कितने बेवकूफ होते हैं वे लोग जो नोट दुगना करने के झांसे में आकर अपनी मेहनत की कमाई इन झान्सेबाजों के हाथ में सौंप देते हैं और यह नहीं सोचते कि यदि नोट चमत्कार से दुगने होते तो नोट दुगने करने का दावा करने वाले उनके पास आते ही क्यों | तब तो वे खुद ही अपने नोटों को बार-बार दुगना करके अमीर बन जाते |

मुझे शर्म आती है इस देश के उन अंध विश्वासी लोगों पर,जिन्होंने इस बात पर भरोसा कर कि गणेश -मूर्ति दूध पीने लगी है ,मूर्ति को दूध पिलाने के लिए पंक्ति में खड़े होकर घंटों इन्तजार किया था |उन्हें पास में खड़े उन गरीब बच्चों की भूख की कोई परवाह नहीं थी, जो उनके हाथों में पकड़ें गिलासों में रखे दूध को तरसती निगाहों से देख रहे थे |

इस देश के लोगों को न जाने क्या हो गया है कि जब तक कोई रिश्वत नहीं मांगे, तब तक उन्हें यह विश्वास ही नहीं होता कि उनका काम हो जायेगा |

लानत है इस देश की उन निर्दयी नारियों पर,जो तांत्रिकों के झांसे में आकर मातृत्व प्राप्त करने के लालच में दूसरों के बच्चों की हत्या कर देती हैं |कैसे मूर्ख हैं वे लोग,जो यात्रा के दौरान अनजान लोगों की चिकनी -चुपड़ी बातों में आकर,उनसे घुलमिल जाते हैं और फिर उनसे लुट जाने पर अपना सिर धुनते हैं |

ऐसा इस अजब -अनोखे भारत देश में ही हो सकता है |फिर भी हम अपने देश को महान कहते नहीं थकते |

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