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उत्तर प्रदेश देश का अकेला राज्य जहां तेजी से बढ़ रहे रोजगार के अवसर

25 अगस्त 2016   |  प्रदीप सिंह
 उत्तर प्रदेश देश का अकेला राज्य जहां तेजी से बढ़ रहे रोजगार के अवसर

रोजगार अगर अपने गांव-शहर में ही मिल जाए तो भला कौन परदेश जाना चाहता है। और जब बात गांव के सामान्य तबके की हो तो उसके लिए यह किसी मजबूरी से कम नहीं होता है। दो उदाहरण देता हूं। पहला, याद कीजिए वह दौर जब रोजी-रोटी की तलाश में पलायन कर उत्तरप्रदेश से बड़ी तादाद में लोग महाराष्ट्र और दिल्ली की ओर जाते थे। सिर्फ मुंबई और ठाणे में ऐसे लोगों की संख्या 45 लाख के आसपास आंकी जाती है। ये लोग अपने खून-पसीने से महाराष्ट्र के विकास में योगदान भी देते हैं और गाहे-बगाहे राजनीति का शिकार होकर शिवसेना, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना और कांग्रेस के नेताओं की गालियां और मार भी खाते रहे हैं। कई बार तो उनकी मजबूरियां को देखकर उन पर गंभीर आरोप भी गढ़ दिए जाते रहे हैं। इसके बाद भी लोग दिल्ली और महाराष्ट्र जाते रहे हैं। दूसरा उदाहरण पंजाब का है, वहां पिछले कुछ वर्षों से खेती-किसानी के लिए दिहाड़ी श्रमिकों की जबरदस्त कमी देखने को मिल रही है। पहले उत्तर प्रदेश के जो लोग काम-धंधे की तलाश वहां जाते थे लोगों को जब अपने प्रदेश में काम मिलने लगा, बेहतर आमदनी होने लगी तो उन्होंने वहां जाना बंद कर दिया। ये बताता है कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो लोगों का पलायन रुकेगा। साथ ही साथ प्रदेश की आमदनी भी बढ़ेगी और इसके फलस्वरूप प्रदेश का विकास भी होगा।



एसोचैम की रिपोर्ट बताती है कि पहले जहां दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू जैसे बड़े शहर रोजगार के लिए जाने जाते थे, अब बदले हालात में रोजगार की दृष्टि से उत्तर प्रदेश के शहर आगे हो गए है। एसोचैम के अनुसंधान ब्यूरो के ताजा आंकलन के मुताबिक देश के आठ बड़े शहरों अहमदाबाद, बेंगलूर, चेन्नई, दिल्ली-एनसीआर, हैदराबाद, कोलकाता, मुम्बई तथा पुणे में रोजगार के अवसरों में जहां 14 से 33 फीसदी की गिरावट आई हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मेरठ, कानपुर तथा इलाहाबाद में मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही तथा पिछले वित्त वर्ष के दौरान 68 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ऑनलाइन तथा प्रिंट मीडिया की सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई एसोचैम की आकलन रिपोर्ट बताया गया है कि राजधानी लखनऊ में मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही तथा पिछले वित्त वर्ष के दौरान रोजगार सृजन में 54 फीसदी की वृद्धि हुई है। लखनऊ में नई नौकरियों की बढ़ोतरी दर में साल दर साल 42 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। राजधानी में रोजगार के नए अवसरों में से ज्यादातर शिक्षण, अवस्थापना, रियल एस्टेट, इंजीनियरिंग, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल तथा उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में उत्पन्न हुए हैं। वहीं मेरठ में रोजगार सृजन में 133 प्रतिशत और इलाहाबाद में 127 फीसद बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा उद्योग नगरी कानपुर में 24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश देश का अकेला ऐसा राज्य है जहां सभी प्रमुख शहरों में रोजगार के अवसरों में काफी तेजी से बढ़ोतरी हुई है।



एसोचैम की ओर से पूरे देश में नौकरियों के रुझानों के क्षेत्रवार विश्लेषण के नतीजों के मुताबिक वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलावा आगरा, अलीगढ़, इलाहाबाद, कानपुर तथा मेरठ में विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के 15 हजार 400 नए अवसर उत्पन्न हुए। वर्ष 2012 में यह आंकड़ा 11 हजार 700 का था। इस तरह यह साल दर साल बढ़ोतरी करीब 32 फीसदी रही है। अध्ययन में पाया गया है कि रोजगार के इन नए अवसरों में से 82 प्रतिशत हिस्सा नवप्रवेशी स्तर (शून्य से पांच साल के कार्य अनुभव) के मौकों का है। इनमें से ज्यादातर अवसर शिक्षण, आटोमोबाइल, बैंकिंग वित्तीय सेवाओं एवं बीमा, उपभोक्ता वस्तुओं, खुदरा, दूरसंचार, अवस्थापना, रियल एस्टेट तथा इंजीनियरिंग क्षेत्रों में सृजित हुए है।



गुजरात की औद्योगिक राजधानी कहे जाने वाले अहमदाबाद ने जनवरी 2016 से मार्च 2016 तक की वार्षिक तिमाही में नौकरियों के सृजन में खराब परफार्मेंस दी है। शीर्ष उद्योग मंडल एसोचैम द्वारा किए गए एक अध्ययन में सामने आया है कि इस अवधि में शहर में केवल 20,541 नौकरियों के अवसर उत्पन्न हुए हैं, जो कि भारत के आठ प्रमुख महानगरों में इसी अवधि के दौरान उत्पन्न हुई नौकरियों का 2.4 प्रतिशत है। वहीं, ताजा सर्वे के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2016 की पिछली तिमाही में उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्य में गुजरात के मुकाबले नौकरियों के अधिक अवसर उत्पन्न हुए हैं।



छठी आर्थिक जनवरी 2013 और अप्रैल 2014 के बीच हुई छठी आर्थिक जनगणना के मुताबिक, पिछले आर्थिक जनगणना की तुलना में उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन में 75 प्रतिशत का जबदस्त इजाफा हुआ है। पिछले आर्थिक जनगणना 2005 में हुई थी। इस तरह रोजगार वृद्धि के मामले में उत्तर प्रदेश भारत के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है। यह बात तब और महत्वपूर्ण हो जाती है जब कि 2001 से 2011 तक उत्तर प्रदेश की जनसंख्या में 20 फीसदी की वृद्धि हुई तो उसके मुकाबले नए रोजगार के अवसर पैदा होने में 75 प्रतिशत की बढोतरी हुई है।



मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की मानें तो उनकी सरकार ने नौजवानों को बड़ी संख्या में सरकारी नौकरियां और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए हैं। प्रदेश में विभिन्न बैंकों की 4,000 शाखाएं खोली गई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में नौजवानों को रोजगार मिला है। आबादी के हिसाब से उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है और यहां पर नौजवान भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। ऐसे में, इन नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए और अधिक प्रयास करने की जरूरत है। प्रदेश सरकार की अच्छी औद्योगिक विकास नीति तथा कार्यक्रमों के कारण राज्य में औद्योगिक विकास के लिए अच्छा वातावरण मौजूद है। बड़ी संख्या में निवेशक अपनी औद्योगिक इकाइयां प्रदेश में स्थापित कर रहे हैं। इन औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे है। लखनऊ में स्थापित की जा रही आईटी सिटी के माध्यम से भी 75 हजार लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।



बढ़ती बेरोजगारी सरकार और समाज दोनों के लिए ठीक नहीं है। प्रशिक्षित युवाओं में हुनर व योग्यता की कमी नहीं है, आवश्यकता है इनके हुनर को पहचानने और उसे रोजगार से जोड़ने की। इसलिए नौजवानों को तराश कर उन्हें बेहतर रोजगार मुहैया कराने के लिए ही उत्तर प्रदेश सरकार कौशल विकास कार्यक्रम चला रही है। इससे अब तक 23 लाख से ज्यादा युवाओं को जहां प्रशिक्षित किया जा चुका है, वहीं एक लाख के ज्यादा युवाओं को रोजगार भी दिलाया जा चुका है। यह बताता है कि अखिलेश सरकार के प्रयासों से जहां उत्तर प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, वहीं युवाओं को तरक्की व कामयाबी की नई इबारत लिखने का सुनहरा मौका मिल रहा है।

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