ईमान की शक्ति

26 अगस्त 2016   |  दुर्गेश नन्दन भारतीय   (127 बार पढ़ा जा चुका है)

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घोर मंहगाई के इस दौर में , जान इन्सान की सस्ती है |

जिसने जितना ठगा किसी को, उसकी उतनी हस्ती है ||

पर न हिम्मत हार ओ नेक इन्सान नसीब इसे मान कर ,

भ्रष्टाचार के भँवर में भी, नहीं डूबती ईमान की कश्ती है ||
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