मालूम नहीं

27 अगस्त 2016   |  रवि रंजन गोस्वामी   (120 बार पढ़ा जा चुका है)

मालूम नहीं

जब दर्द न था,

जिंदगी का पता न था ।

अब लंबी उम्र की दुआ ,

ख़ौफ़ज़दा करती है ।

अपनी मर्ज़ी से मैं,

न आया, न जाऊँगा ।

होगी विदाई बिना मर्जी ।

पुकारता हूँ तो वो नहीं सुनता ,

क्यों आवाज़ दूं उसे ,ए जिंदगी ।

दिखलाके आइना ,

चेहरा उसे दिखाए कोई ।

सुनते है बड़ा मोम है ।

मैं बेतजुर्बा हूँ ।

मुझे मालूम नहीं ।

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