गीत

07 सितम्बर 2016   |  आलोक सिन्हा   (78 बार पढ़ा जा चुका है)

गीत

जिस देश में शिक्षक का मन घायल हो ,

उसका तुम भविष्य अँधेरे में समझो |

शिक्षा तो है आधार जिन्दगी का ,

इससे ही हर व्यक्तित्व निखरता है |

गांधी टैगोर विवेकानंद जैसा ,

मन पावन आदर्शों में ढलता है |

जिस देश में जर्जर , दिशा हीन शिक्षा ,

उस देश को दुःख के घेरे में समझो

ऐ बी सी डी को सम्मानित आसन ,

लेकिन क ख ग हर जगह उपेक्षित हों |

वह देश छुयेगा नील गगन कैसे ,

हर प्रतिभा आरक्षण से बाधित हो |
जो देश स्वार्थ लिप्सा में बस डूबा ,

उसका प्रभात तुम कोहरे में समझो

छल को तो सारे दुर्लभ सुख सम्भव ,

पर श्रम पल भर मुस्कानों को तरसे |

चेतना भटकती सूनी सड़कों पर ,

वाचालों के घर मधुवन से हर्षे |

जिस देश में ऐसी विषम नीतियाँ हों ,

उसका सद्चरित्र तुम खतरे में समझो |

अगला लेख: एक कथन



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
21 सितम्बर 2016
गा
एकबड़े कक्ष में देश के बड़े बड़े नेताओं के बहुत से चित्र लगे हैं | एक बच्चा अपनी माँके साथ चित्र देखता हुआ जब गांधी जी के चित्र के सम्मुख पहुंचता है तो वह अपनी माँसे पूछता है --- चरवाहे सी लाठी पकड़े चिकनी पतली छोटी, बप्पाजैसी घड़ी , कमर में ताऊ जैसी धोती
21 सितम्बर 2016
24 अगस्त 2016
मे
जब रचना अपने बच्चे को कपड़े पहना कर आंगन में अपनी अटेची उठानेके लिए आगे बढी तो मुझे सामने देख कर एक साथ मुझ से जोर से चिपट गयी और कंघे पर सररख कर फफकते हुए बोली --- बड़े भैया ! अब मैं बहुत थक गई हूँ | अब मुझसे और नहीं सहाजाता | ऐसा लगता है जैसे सारी जिन्दगी ही हाथ से फि
24 अगस्त 2016
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x