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न ये संयोग हैं, न अपवाद

09 सितम्बर 2016   |  देवेन्द्र प्रसाद
न ये संयोग हैं, न अपवाद



एण्डले, फ्राँस में एक ऐसा विशाल पत्थर है, जो छोटे-से आधार पर नाचते लट्टू की सी स्थिति में खड़ा है। इसे देखने पर ऐसा लगता है, जैसे यह किसी विद्युत चुम्बकीय शक्ति के प्रभाव से टिका हो। वै ज्ञान िकों ने वहाँ ऐसे किसी बल की सम्भावना की सूक्ष्मता से जाँच-परख की, परखे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सके। विचित्र बात यह है कि वह मौसम सम्बन्धी भविष्यवाणी भी करता है। मौसम साफ रहेगा, तो वह अपनी उसी धुरी पर चुपचाप खड़ा रहेगा, किन्तु यदि मौसम खराब होने वाला हो, तो इसकी सूचना वह धीरे-धीरे हिल-डुल कर देता है। विशेषज्ञ इस बात से हैरान है कि इस स्थिति में उसका सन्तुलन क्यों नहीं बिगड़ता।

इसी प्रकार स्कॉटलैंड के डंकल्स नामक स्थान पर 14 फुट लम्बा, 7 फुट चौड़ा तथा 5 फुट ऊँचा एक पत्थर तीन छोटे-छोटे आधारों पर इस तरह स्थिर है, जैसे कोई विशालकाय कछुआ विश्राम कर रहा हो। पुरातत्व-वेत्ताओं का कहना है कि यह शिलाखंड विगत बीस लाख वर्षों से इसी स्थिति में पड़ा हुआ है, जबकि इस कालखण्ड में आँधी-तूफान से अगणित पहाड़ ध्वस्त हो गया।

आयरलैण्ड के कार्क नगर में ‘ब्लानी’ नामक एक ऐसा पत्थर है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे चूमने वाले में वाक्पटुता की अद्भुत क्षमता का विकास हो जाता है। प्रतिवर्ष मात्र इस पत्थर को चूमने के उद्देश्य से हजारों व्यक्ति दूर-दूर से यहाँ आते है।

वृक्ष-वनस्पतियों की दुनिया भी कोई कम विचित्र नहीं हैं कुछ पेड़ तो सामान्य आकार से इतने अधिक मोटे हो जाते है कि उनमें घर बनाया जा सके और कुछ पादप जगत के सारे नियमों को तोड़ते हुए विज्ञान के समक्ष उसे समझने के लिए चुनौती प्रस्तुत करते है। नारमैण्डी, फ्राँस में एक विशालकाय ओक वृक्ष है, जिसकी आयु हजार वर्ष बतायी जाती है। इसके तने की दानवी मोटाई को देखकर एक अंग्रेज के मन में विचार आया कि क्यों न इसमें गिरजाघर बनाया जाय, ताकि अधिकाँश लोग इस वृक्ष के बारे में जान सकें। इसी उद्देश्य को लेकर उसने तने को खोखला बनाकर एक दो मंजिला चर्च बनाया, जो 1896 से लेकर अब तक ज्यों-का -त्यों बना हुआ है।

इण्डोनेशिया के सुमात्रा द्वीप और अमेरिका के चिली देश में एक ऐसा पेड़ है, जो सदा आँसू बहाता रहता है। दिन भर में यह इतना रोता है कि उसके आँसू से एक छोटा गड्ढा भर जाता है।
ध्रुव प्रदेशों के बारे में कहा जाता है कि वहाँ एक साथ कई-कई सूर्य, कई-कई चन्द्रमा उदित होते है। सूर्य भी वहाँ हरे रंग का होता है। इसके अतिरिक्त दूर की वस्तुएँ हवा में लटकती दिखाई पड़ती है। छोटे टीले पहाड़ जितने बड़े प्रतीत होते है। यथार्थ में ऐसा होता तो नहीं है पर किरणों की वक्रता के कारण पर्यवेक्षक को यह दृष्टिभ्रम हो जाता है।

प्रकृति में कई बार इसी प्रकार की ऐसी घटनाएँ घटती है, ऐसा कुछ देखने को मिलता है, जिनकी समीक्षा में मात्र यही कहना पड़ता है कि प्रकृति भी कितनी सुगढ़ और श्रेष्ठ कलाकार है, जो स्वयं भी समय और नियमितता की इतनी पाबंद है, जितना मनुष्य भी नहीं।

अमेरिका के केंटुकी प्रान्त में मैमथ नाम की एक ऐसी गुफा है, जिसे प्रकृति ने अपने सुन्दर और सधे हाथों से निर्मित किया है। सुन्दर डिजाइनों से युक्त खम्भे और बड़े-बड़े कमरे कोई 200 मील क्षेत्र में फैले हुए है। इसका सबसे आश्चर्यजनक भाग इसकी गगनचुम्बी दीवारें है। जो कार्य किसी कुशल इंजीनियर से हो सकता है, उसे प्रकृति ने स्वतः कर दिखाया, सहसा इस पर विश्वास नहीं होता, पर यह सत्य है कि उसे प्रकृति ने बनाया है।

न्यूजीलैण्ड का वैरामों केव अपनी अनूठी कलाकृति के लिए प्रसिद्ध है। चूने के पत्थरों वाली इस गुफा में ऐसी प्रतिमाएँ-ऐसी रचनाएँ है, जैसे बड़े हॉल में कोई सम्मेलन हो रहा हो, कहीं एक परिवार बैठा हो। अँधेरी गुफा के अन्दर एक विशेष प्रकार के कीड़ों द्वारा प्रकाशित तारामण्डल को देखने हजारों लोग जाते है एवं प्रकृति के इस अद्भुत करिश्मे का आनन्द लेते है।

संसार में अगणित ऐसे स्थान है जहाँ भू-गर्भ से अधिक ताप व दबाव के कारण धरती को फोड़कर फव्वारे निकल पड़ते है और गर्म गीजर्स का

रूप धारण कर लेते है। यह गीजर्स स्वयं में एक विचित्रता के लिए होते है, वह यह कि वे लगभग एक घण्टे के अन्तर से बराबर छूटते रहते है और इस तरह यह सिद्ध करते है कि प्रकृति को समय और नियमितता का भी ज्ञान है। न्यूजीलैण्ड का टोटोरआ शहर ‘सल्फर सिटी’ के नाम से प्रख्यात है। सल्फरयुक्त 50 फीट ऊँचे उबलते फव्वारे यहाँ सहज ही देखे जा सकते है। कई ऐसे स्थान हैं, जहाँ कीचड़ भी उबलता रहता है। यहाँ सल्फर की मात्रा अधिक होने के कारण चर्मरोगी स्नान करते एवं रोगमुक्त हो जाते है। इस क्षेत्र में गरम वाष्प भी निकलती है। जिसे एकत्रित कर बिजली बनाई जाती है। इस थर्मल वेली में ‘वेराकेई जियोथर्मल पॉवर डेवलपमेंट’ नामक कम्पनी बिजली बनाती है।

प्राचीनकाल में ऐसे अनेक अखण्ड दीपकों के प्रमाण मिले है, जो सैकड़ों वर्षों से जलते आ रहे थे। मूर्धन्य इतिहासवेत्ता कैमडन ने खुदाई में मिले ऐसे अनेक जलते दीपकों का वर्णन अपनी पुस्तक में किया है। सेंट आबस्टाइन ने अपनी संस्मरण पुस्तक में लिखा है कि वीनस देवी के मन्दिर में एक ऐसा दीपक था, जिस पर तेज हवा और वर्षा का कोई प्रभाव नहीं पड़ता था। पुरातत्व विभाग ने सन् 1840 में स्पेन के कुतर्ण क्षेत्र में एक कब्र की खुदाई के वक्त ऐसा ही जलता दीपक प्राप्त किया था। विशेषज्ञों का मत था कि यह कई सौ वर्षों से जलता चला आ रहा है। इटली के नसीदा द्वीप में खेत की जुताई के समय एक किसान की एक कब मिली। जब उसे खोदा गया तो काँच के बक्से में बन्द एक अखण्ड ज्योति मिली, जो लम्बे काल से उसी में बन्द जल रही थी।

आयुष्य बढ़ने के साथ-साथ काले बाल सफेद हो जाते है-यह शरीर तंत्र का सामान्य नियम है, किंतु चीन के एक 18 वर्षीय कृषक के बाल विगत दस वर्षों में पहले काले से श्वेत हुए, फिर श्वेत से श्याम और अब पुनः एक बार काले से सफेद हो गये हैं

सन् 1883 में इटली के सैनब्रूनो क्षेत्र में एक विचित्र भूकम्पयुक्त विस्फोट हुआ। इसमें अगणित इमारतें टूटी और विस्फोट ने नगर के प्रधान मठ के प्रार्थनाकक्ष को चाक पर चढ़े बर्तन की तरह घुमा दिया और बिना किसी क्षति पहुँचाये दूसरी जगह ज्यों-का-त्यों खड़ा कर दिया, जबकि मठ का अन्य भाग टूटकर विस्मार हो गया।

इसी देश के टोरोण्टो शहर के समीप समुद्र में एक सफेद रंग के पानी का फुहारा फूटता है। इसका पानी मीठा है। खारे समुद्र में मीठे पानी का फुहारा फूटना किस प्राकृतिक विचित्रता का परिणाम है, यह अभी जाना नहीं जा सका है।

ब्राजील के एक नगर वैलेस डोपारा पर दोपहर को 2 से 4 तक पूरे दो घंटे नियमित रूप से वर्षा होती है। इसमें व्यतिरेक कदाचित ही कभी होता है। उस क्षेत्र के निवासी इन दो घण्टों में मध्याह्न अवकाश मनाते है।

उपर्युक्त घटनाक्रम एक विचित्रताएँ, मात्र वाक्विलास या मनोरंजन के लिये नहीं वर्णित की गयी। वैज्ञानिक कहते है। कि हरे पदार्थ को कोई जन्म देने वाला पदार्थ एवं घटनाक्रम का कोई-न-कोई कारण अवश्य होता है। यही बात अध्यात्मवादी भी कहते है, आप्तवचनों-वेदान्तमतों के अनुसार यहाँ सब कुछ सोद्देश्य है। कुछ भी अकारण नहीं है। इन प्रतिपादनों के अनुसार इन अपवाद स्वरूप घटने वाले प्रसंगों के मूल में भी कोई सत्ता होनी चाहिए। वह कौन-सी सत्ता होनी चाहिए। वह कौन-सी सत्ता है, कैसे यह सब इस रूप में सम्पन्न हो जाता है? यह ऊहापोह वैज्ञानिकों के लिए उसने छोड़ रखा है। क्या ये मात्र संयोग है? अथवा कभी -कभी होने वाले अपवाद है? उत्तर वैज्ञानिकों को देना है।

न ये संयोग हैं, न अपवाद

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